उदयपुर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि: पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के प्रयासों से शहर की पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित
उदयपुर, 2 दिसम्बर: उदयपुर शहर की भविष्य की पीढ़ियों के लिए पेयजल सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है। देवास-तृतीय एवं देवास-चतुर्थ जैसी बहुप्रतीक्षित जलापूर्ति परियोजनाओं को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्टेज-1 स्वीकृति प्राप्त हो गई है। यह उपलब्धि पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के निरंतर प्रयासों और केंद्र सरकार में उनके प्रभावी हस्तक्षेप का परिणाम मानी जा रही है।
राज्यपाल कटारिया ने उदयपुर की जल समस्या को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता बनाते हुए परियोजना की निगरानी की। उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संवाद कर लंबित वन स्वीकृतियों की प्रक्रिया को गति दी। इस प्रयास का प्रत्यक्ष परिणाम यह है कि स्वीकृति अपेक्षाकृत कम समय में मिल सकी।
स्टेज-1 स्वीकृति मिलने पर राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि झीलें केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। इन परियोजनाओं से पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा और झीलों की ऐतिहासिक गरिमा सुरक्षित रहेगी। उन्होंने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों के सहयोग की सराहना भी की।
नाथियाथल के पास बनेगा बांध, आकोदड़ा बांध से पिछोला में आएगा पानी
जल संसाधन विभाग उदयपुर के अधीक्षण अभियंता मनोज जैन के अनुसार देवास-तृतीय परियोजना में गोगुन्दा तहसील के नाथियाथल गांव के पास 703 एमसीएफटी क्षमता का बांध बनाया जाएगा। जल को 10.50 किलोमीटर लंबी सुरंग के माध्यम से देवास-द्वितीय (आकोड़दा बांध) तक लाया जाएगा और फिर मौजूदा प्रणाली से पिछोला झील तक पहुंचाया जाएगा। देवास-चतुर्थ परियोजना में अम्बा गांव के पास 390 एमसीएफटी क्षमता का बांध निर्मित होगा, जो 4.15 किलोमीटर की सुरंग से देवास-तृतीय से जुड़ेगा।
साल भर लबालब रहेंगे पिछोला और फतहसागर
दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद उदयपुर शहर को दशकों तक निर्बाध पेयजल उपलब्ध होगा। साथ ही पिछोला, फतहसागर और स्वरूपसागर झीलों का जलस्तर स्थायी रूप से बनाए रखा जा सकेगा। इससे पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा और पर्यटन तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया जीवन मिलेगा।