ग्रामीण-शहरी समन्वय, उपचारित जल के पुन: उपयोग और संयंत्रों की क्षमता के अनुरूप संचालन पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
उदयपुर, 5 अक्टूबर: प्रदेश में स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाने के लिए मल-कीचड़ प्रबंधन, उपचार संयंत्रों की क्षमता के अनुरूप उपयोग तथा ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में मंथन हुआ। स्थानीय निकाय निदेशालय, राजस्थान एवं सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में प्रदेश के 70 से अधिक नगरीय निकायों के नोडल अधिकारियों और अभियंताओं ने भाग लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ स्वच्छता अभियान के ब्रांड प्रतिनिधि के.के. गुप्ता, संयुक्त निदेशक मुरारी लाल शर्मा, नगर निगम उदयपुर के अधीक्षण अभियंता लखन लाल बैरवा, डॉ. गौरव सिंह तथा सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के निदेशक सुब्रत चक्रवर्ती सहित अन्य अधिकारियों ने किया।
सत्यनारायण वर्मा ने राजस्थान में मल-कीचड़ प्रबंधन की वर्तमान स्थिति पर प्रस्तुतीकरण दिया। संयुक्त निदेशक मुरारी लाल शर्मा एवं सहायक अभियंता डॉ. गौरव सिंह ने ग्रामीण और शहरी स्वच्छता अभियानों के बीच समन्वय तथा उपयोग किए गए जल के प्रबंधन की स्थिति से अवगत कराया।
सीएसई की ओर से ज्योतिप्रसाद एवं डॉ. सुमिता सिंघल ने नगरीय निकायों की क्षमता बढ़ाने और मल-कीचड़ प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों की जानकारी दी। सलाहकार धेनु खट्टर ने प्रस्तावित क्षमता विकास कार्यशालाओं की रूपरेखा रखी।
उत्तर प्रदेश और ओडिशा से आए विशेषज्ञों ने भूमिगत मल निकासी व्यवस्था से वंचित क्षेत्रों में स्वच्छता प्रबंधन के सफल अनुभव साझा किए। उपचारित जल एवं जैव ठोस पदार्थों के पुन: उपयोग, आधारभूत संरचनाओं के संचालन, शासन और निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। स्वच्छ भारत मिशन शहरी के सूचना, शिक्षा एवं संचार प्रभारी राहुल बंसीवाल ने जनजागरूकता और स्वच्छता संबंधी नवाचारों की जानकारी दी। कार्यशाला का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ।