झीलों की नगरी में पानी की ऐसी बर्बादी!

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देवास प्रथम (अलसीगढ़) से लाया गया पानी भी स्वरूप सागर के सीपेज में बह जाने का खतरा
हाथीवाला पार्क पार्किंग और मीट मार्केट के पीछे भी चौबीसों घंटे पानी की निकासी, जल संरक्षण के दावों पर उठे सवाल
उदयपुर, 2 अक्टूबर:
जिस शहर की पारंपरिक जल व्यवस्था और वाटर चैनल को दुनिया के लिए अनुकरणीय बताया गया, जहां पानी की एक-एक बूंद को सहेजने की मिसाल दी जाती है और जिसे समझने के लिए देशभर के जल संसाधन मंत्रियों एवं प्रमुख शासन सचिवों को पिछले वर्ष “वाटर विजन : 2047” के आयोजन में बुलाया गया था, उसी झीलों की नगरी में बड़ी मात्रा में पानी लगातार नालियों में बह रहा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वरूप सागर के सीपेज से निकल रहा पानी यदि इसी तरह बहता रहा तो देवास प्रथम (अलसीगढ़) से लाया गया पानी भी बड़ी मात्रा में नालियों में जाने का खतरा है।
गांधी जयंती पर अधिकारियों को दिखाई पानी की बर्बादी
गांधी जयंती के अवकाश के दिन जल संरक्षण को लेकर जलदाय विभाग के अधिकारियों ने झील संवर्धन एवं विकास समिति के पूर्व सदस्य प्रो. महेश शर्मा को झीलों से व्यर्थ बह रहे पानी की स्थिति की जानकारी देने के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान प्रो. शर्मा ने अधीक्षण अभियंता श्री वीरेंद्र चौधरी और अधिशासी अभियंता श्री जेराराम को स्वरूप सागर से भारी मात्रा में चौबीसों घंटे नालियों में बह रहे पानी की स्थिति दिखाई।
लगातार बहते पानी को देखकर अधिकारियों ने भी आश्चर्य और चिंता व्यक्त की। अधिकारियों ने तत्काल नगर निगम से बातचीत कर इस पानी को पुनः झील में पहुंचाने की दिशा में कार्रवाई करने की बात कही।
प्रो. शर्मा ने सुझाव दिया कि यदि पानी का यह रिसाव सीपेज के कारण हो रहा है तो ग्राउटिंग सहित तकनीकी उपायों से इसे स्थायी रूप से बंद किया जाना चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार, यदि इस निकासी को नहीं रोका गया तो देवास प्रथम (अलसीगढ़) से लाए जाने वाले पानी की बड़ी मात्रा भी इसी रास्ते नालियों में बह सकती है।
हाथीवाला पार्क की पार्किंग से भी लगातार पानी नालियों में
प्रो. शर्मा ने अधिकारियों का ध्यान नगर निगम परिसर स्थित हाथीवाला पार्क की पार्किंग की ओर भी आकर्षित किया। उनका कहना है कि यहां से भी भारी मात्रा में पानी दिन-रात बह रहा है और लगभग हर डेढ़ घंटे में पानी नालियों में छोड़ा जा रहा है।
उनके अनुसार यहां व्यर्थ बहने वाले पानी की मात्रा अकोदड़ा तथा मादड़ी से लाए जा रहे पानी के बराबर हो सकती है।
एक तरफ शहर की जल आवश्यकता पूरी करने के लिए दूर-दराज के जल स्रोतों से पानी लाने की आवश्यकता पड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उपलब्ध पानी का इस तरह नालियों में चले जाना जल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मीट मार्केट के पीछे भी पानी की लगातार निकासी
इतना ही नहीं, स्वरूप सागर के मीट मार्केट के पीछे से भी दिन-रात पानी व्यर्थ बहने की बात सामने आई है।
यदि शहर के अलग-अलग हिस्सों में बेसमेंट से इसी तरह लगातार पानी बहता रहा तो जल संकट के समय इसका सीधा असर जल उपलब्धता पर पड़ना स्वाभाविक है।
एक ओर ‘वाटर विजन : 2047’, दूसरी ओर नालियों में बहता पानी
उदयपुर की पारंपरिक झील व्यवस्था को देश और दुनिया के सामने जल संरक्षण की मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। ऐसे में शहर की झीलों और उनसे जुड़ी जल व्यवस्थाओं से लगातार पानी का रिसाव होना चिंता का विषय है।
प्रो. महेश शर्मा ने मांग की है कि स्वरूप सागर के सीपेज, हाथीवाला पार्क पार्किंग तथा मीट मार्केट के पीछे से हो रही पानी की निकासी की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए और जहां संभव हो, रिसाव को स्थायी रूप से बंद किया जाए।
साथ ही उन्होंने कहा कि दूर-दराज से लाए जा रहे पानी की एक-एक बूंद को बचाना और उसका समुचित उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
क्योंकि जिस शहर की पहचान ही उसकी झीलों और जल संस्कृति से है, वहां पानी का नालियों में बहना केवल पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक जल विरासत के प्रति हमारी जिम्मेदारी की भी परीक्षा है।