शिक्षक दुर्गाराम ने 32 बाल श्रमिकों को स्कूल से जोड़ा

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2500 किमी का सफर तय कर घर-घर पहुंचे दुर्गाराम मुवाल, बालश्रम रोकने के साथ 20 से अधिक दिव्यांग बच्चों को भी शिक्षा से जोड़ने की पहल
उदयपुर, 1 सितम्बर:
बालश्रम के कारण स्कूल से दूर हुए बच्चों को फिर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कृत शिक्षक दुर्गाराम मुवाल ने मिसाल पेश की है। शिक्षा विभाग ने उन्हें बालश्रम से मुक्त बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाने का दायित्व सौंपा था। मुवाल ने करीब 2500 किलोमीटर का सफर तय कर 32 बच्चों के घर-घर पहुंचकर अभिभावकों को समझाया और उनका स्कूलों में पुन: प्रवेश करवाया।
घर-घर जाकर समझाए अभिभावक
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी समग्र शिक्षा उदयपुर वीरेंद्र यादव ने बताया कि सूरत में बालश्रम से मुक्त कराए गए कई बच्चे घर लौटने के बाद भी स्कूल से नहीं जुड़ पाए थे। मुवाल ने अभिभावकों की काउंसलिंग कर बच्चों को शिक्षा से जोड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दस्तावेजों के अभाव में भी किसी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। जरूरत पड़ने पर वे स्वयं बच्चों के दस्तावेज बनवाने में मदद कर रहे हैं।
बालश्रम के पीछे सामने आईं कई वजहें
मुवाल के अनुसार कई बच्चे दलालों के माध्यम से दूसरे राज्यों में भेजे जाते हैं। कुछ मामलों में बच्चों की कमाई पिता शराब पर खर्च कर देते हैं, जबकि कुछ बच्चे दूसरे बच्चों को देखकर बालश्रम में चले जाते हैं। दो बच्चों के पिता की मृत्यु होने के कारण वे मजबूरी में मजदूरी करने लगे थे।
दिव्यांग बच्चों को भी शिक्षा से जोड़ने की पहल
आदिवासी क्षेत्रों के दौरे में मुवाल को 20 से अधिक दिव्यांग बच्चे मिले, जो विशेष स्कूलों की जानकारी नहीं होने से शिक्षा से दूर थे। उन्होंने इनके मेडिकल प्रमाणपत्र और दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे पहले राजस्थान पुलिस की मानव तस्करी रोधी टीम को भी मुवाल प्रशिक्षित कर चुके हैं और हजारों बच्चों को बालश्रम व बाल तस्करी से मुक्त कराने में योगदान दे चुके हैं।