93 बार चुनी हुई सरकारें गिराने वाली कांग्रेस आज लोकतंत्र बचाने की बात कर रही : चतुर्वेदी

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एसआईआर विरोध को बताया राजनीतिक दुष्प्रचार, आपातकाल और ईवीएम पर कांग्रेस को घेरा
उदयपुर, 31 अक्टूबर (सुभाष शर्मा):
राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं भाजपा नेता अरुण चतुर्वेदी ने कांग्रेस के लोकतंत्र बचाओ अभियान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आजादी के बाद करीब 93 बार संविधान के अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल कर चुनी हुई सरकारें बर्खास्त करने वाली कांग्रेस आज लोकतंत्र को खतरे में बता रही है। उसका यह दावा ‘सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली’ जैसा है।
शनिवार को भाजपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत में चतुर्वेदी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध को राजनीतिक दुष्प्रचार करार दिया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण सामान्य चुनावी प्रक्रिया है। आजादी के बाद यह 12वीं बार हो रहा है। इनमें 10 बार कांग्रेस शासनकाल और एक बार अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय यह प्रक्रिया हुई। अब कांग्रेस इसी पर सवाल उठाकर भ्रम फैला रही है।
चतुर्वेदी ने 1975 के आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पद छोड़ने के बजाय आपातकाल लगा दिया। विपक्षी नेताओं को जेल में डाला और मीडिया पर सेंसरशिप लागू की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने वाली कांग्रेस आज ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पास प्रत्येक बूथ पर बीएलए-1 नियुक्त हैं, इसके बावजूद एसआईआर में 1300 लोगों की ओर से भी आधिकारिक आपत्तियां दर्ज नहीं करवा पाई। भाजपा ने इसके जवाब में 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आरोपों पर उन्होंने कहा कि यदि वे गंभीर हैं तो मीडिया में बयानबाजी के बजाय उचित कानूनी मंच पर जाएं। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताने संबंधी बयान पर भी चतुर्वेदी ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शाह को भारत और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट करनी चाहिए। इस दौरान विधायक ताराचंद जैन, फूलसिंह मीणा, महापौर पारस सिंघवी, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ और प्रमोद सामर मौजूद रहे।