1500 करोड़ की योजना, एआई निगरानी, भोजन-पानी की उपलब्धता, बचाव व पुनर्वास पर जोर; उदयपुर में बनेगा वन्यजीव उपचार केंद्र
उदयपुर, 11 अक्टूबर: राजस्थान के जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने 1500 करोड़ रुपए की पृथ्वी परियोजना शुरू करने की घोषणा की है। परियोजना का फोकस केवल जंगलों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाने, उनके लिए भोजन-पानी की उपलब्धता बढ़ाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर भी रहेगा। एआई आधारित निगरानी, बचाव एवं पुनर्वास सुविधाएं तथा वन्यजीव उपचार केंद्र इसके प्रमुख हिस्से होंगे।
प्राकृतिक आवास और भोजन-पानी पर जोर
परियोजना के तहत वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में सुधार और उनके लिए पर्याप्त भोजन-पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। प्री-बेस ऑगमेंटेशन के तहत मांसाहारी वन्यजीवों के प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य वन्यजीवों को जंगल के भीतर ही पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि वे भोजन की तलाश में मानव आबादी की ओर कम आएं।
एआई से निगरानी, त्वरित बचाव की व्यवस्था
परियोजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे संवेदनशील क्षेत्रों और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। घायल या संकट में फंसे वन्यजीवों के लिए बचाव, उपचार और पुनर्वास सुविधाएं भी मजबूत की जाएंगी। इसके अलावा 25 करोड़ रुपए की लागत से 291 वन्यजीव एम्बुलेंस और रैपिड मोबिलिटी टीमों की व्यवस्था की घोषणा की गई है।
मानव-वन्यजीव टकराव कम करना भी लक्ष्य
जंगलों से सटे गांवों और कृषि क्षेत्रों में वन्यजीवों के पहुंचने से होने वाले संघर्ष को कम करने के लिए कॉनफ्लिक्ट मिटिगेशन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। बेहतर निगरानी, त्वरित बचाव और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में सुधार से ऐसे मामलों को कम करने का प्रयास होगा।
उदयपुर में वन्यजीव उपचार केंद्र
उदयपुर में वन्यजीव उपचार केंद्र स्थापित करने की योजना है। इसके साथ मेनार आर्द्रभूमि सहित 25 आर्द्रभूमियों के लिए एकीकृत प्रबंधन योजनाएं तैयार की जाएंगी। हालांकि, परियोजना की सफलता केवल बजट से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन, जंगलों में जलस्रोतों के संरक्षण, अवैध शिकार पर नियंत्रण, आग की रोकथाम और स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी से तय होगी।