66 लाख के छात्रावास में ‘लीपापोती’ का खेल उजागर

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दरारों पर पुट्टी चढ़ाकर छिपाई जा रही घटिया निर्माण की सच्चाई
डूंगरपुर, 9 अप्रैल:
ओबरी क्षेत्र में 66 लाख रुपए की लागत से बने नवनिर्मित बालक छात्रावास में घटिया निर्माण और मिलीभगत की परतें खुलने लगी हैं। मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने सुधार के बजाय ‘लीपापोती’ का रास्ता अपनाया, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजस्थान स्टेट कृषि विपणन बोर्ड द्वारा श्री विनायक कंस्ट्रक्शन को दिए गए इस निर्माण कार्य में कुछ ही महीनों में चार कमरों में गहरी दरारें उभर आईं। खबर प्रकाशित होने के बाद ठेकेदार ने जल्दबाजी में दरारों को सीमेंट और पुट्टी से भर दिया, लेकिन यह केवल अस्थायी समाधान है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भवन की नींव भी मानकों के अनुरूप नहीं बनाई गई, जिससे पूरी संरचना कमजोर हो गई है।
जांच के नाम पर खानापूर्ति
बोर्ड अधिकारियों ने JEN और AEN को भेजकर जांच का दावा किया, लेकिन मौके पर ठोस कार्रवाई के बजाय ठेकेदार को ही सुधार का जिम्मा सौंप दिया गया। इससे तकनीकी अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं और मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
अभिभावकों में डर, जनप्रतिनिधि मौन
छात्रावास में रहने वाले बच्चों के अभिभावकों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि केवल दरारें भरने से भवन सुरक्षित नहीं हो सकता और बच्चों की जान खतरे में बनी हुई है। वहीं, जनप्रतिनिधियों की ओर से भी ठोस पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
जवाब देने से बचते अधिकारी
मामले में अधिशासी अभियंता (XEN) गोपाल सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने संतोषजनक जवाब देने के बजाय फोन काट दिया और बाद में कॉल भी रिसीव नहीं किए।