हल्दीघाटी विजय का गौरव इतिहास की भ्रांतियों का करेगा अंत : श्रीजी श्याम शरण

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उदयपुर, 17 जून: समारोह में विशिष्ट अतिथि निम्बार्काचार्य श्रीजी श्याम शरण देवाचार्य ने कहा कि यह आयोजन केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का महापर्व है। उन्होंने कहा कि वर्षों से इतिहास के संबंध में फैलाई गई भ्रांतियों का निराकरण अब समाज के सामने हो रहा है और महाराणा प्रताप के वास्तविक गौरव को पुनः स्थापित किया जा रहा है।
अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि मेवाड़ की भूमि शौर्य और भक्ति दोनों की पावन धरा है। एक ओर इस भूमि ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जैसे राष्ट्रनायक को जन्म दिया, वहीं दूसरी ओर भक्तिमती मीराबाई जैसी महान कृष्णभक्त को भी दुनिया को दिया। उन्होंने कहा कि जब मातृभूमि और सनातन संस्कृति पर संकट आया, तब महाराणा प्रताप ने भगवान श्रीराम के “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” के आदर्श को आत्मसात करते हुए अपना सर्वस्व राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।
श्रीजी श्याम शरण ने कहा कि राष्ट्रभक्ति की यही चेतना समय-समय पर विभिन्न रूपों में प्रकट होती रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे” की भावना के साथ मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित है। उन्होंने समाज से जाति, वर्ग और संकीर्णताओं से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश देती है। समारोह में राष्ट्रभक्ति का वातावरण तब और प्रखर हो गया जब उपस्थित जनसमूह ने “चंदन है इस देश की माटी, तपोभूमि हर ग्राम है, हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा-बच्चा राम है” गीत का सामूहिक गायन किया।