धुएँ का छलावा : तंबाकू की गिरफ्त से मुक्त होने का समय

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सत्य भूषण शर्मा, उदयपुर
मानव जीवन प्रकृति का अमूल्य उपहार है, किंतु आधुनिक जीवनशैली की अनेक बुरी आदतें इस अमूल्य धरोहर को निरंतर क्षति पहुँचा रही हैं। तंबाकू का सेवन ऐसी ही एक घातक आदत है, जिसने विश्वभर में करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य, परिवार और भविष्य को प्रभावित किया है। इसी गंभीर चुनौती के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है।
आज तंबाकू केवल एक नशीला पदार्थ नहीं, बल्कि एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, जर्दा, खैनी, हुक्का और ई-सिगरेट जैसे उत्पाद युवाओं को आकर्षित करने के लिए आधुनिक पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार का सहारा लेते हैं। इनके पीछे छिपा सच यह है कि इनका प्रत्येक कश और प्रत्येक सेवन शरीर को धीरे-धीरे बीमारियों के अंधकार की ओर धकेलता है।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि तंबाकू की लत का शिकार बड़ी संख्या में किशोर और युवा हो रहे हैं। मित्रों के दबाव, जिज्ञासा, फैशन तथा सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण कई युवा इसकी शुरुआत कर देते हैं। प्रारंभ में यह केवल प्रयोग प्रतीत होता है, लेकिन धीरे-धीरे यह ऐसी आदत बन जाती है जिससे बाहर निकलना कठिन हो जाता है। यही कारण है कि युवाओं को तंबाकू के आकर्षण के पीछे छिपे खतरों से अवगत कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
तंबाकू शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करता है। चिकित्सकीय शोध बताते हैं कि इसके सेवन से फेफड़ों का कैंसर, मुख कैंसर, गले का कैंसर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, दमा, श्वसन रोग तथा अनेक अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास रहने वाले लोग भी परोक्ष धूम्रपान के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं।
भारत में तंबाकू सेवन की समस्या विशेष रूप से गंभीर है। हर वर्ष लाखों लोगों की मृत्यु तंबाकूजनित बीमारियों के कारण होती है। इसके उपचार पर होने वाला विशाल आर्थिक व्यय परिवारों और राष्ट्र दोनों के लिए चिंता का विषय है। तंबाकू पर खर्च होने वाली राशि यदि शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार के विकास पर लगाई जाए तो समाज का स्वरूप कहीं अधिक सकारात्मक हो सकता है।
तंबाकू का दुष्प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक और आर्थिक जीवन को भी प्रभावित करता है। अनेक परिवारों में तंबाकू की लत घरेलू आय का बड़ा हिस्सा निगल जाती है। परिणामस्वरूप बच्चों की शिक्षा, पोषण और अन्य आवश्यक जरूरतें प्रभावित होती हैं। कई बार तंबाकूजनित बीमारियां पूरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल देती हैं।
सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा तंबाकू नियंत्रण के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध, चेतावनी चित्र, जागरूकता अभियान, तंबाकू मुक्त विद्यालय तथा नशा मुक्ति केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। किंतु इन प्रयासों की वास्तविक सफलता तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसमें अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।
तंबाकू की लत छोड़ना एक चुनौती अवश्य है, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से इसे छोड़ा जा सकता है। परिवार का सहयोग, चिकित्सकीय परामर्श, योग, ध्यान, खेलकूद और सकारात्मक गतिविधियाँ व्यक्ति को इस बुरी आदत से दूर रखने में सहायक सिद्ध होती हैं।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस हमें केवल एक दिन के लिए नहीं, बल्कि जीवनभर के लिए जागरूक रहने का संदेश देता है। यदि हम स्वयं तंबाकू से दूर रहें और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करें, तो एक स्वस्थ और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव है।
“जीवन का हर पल अनमोल है,
तंबाकू से दूरी ही इसका मोल है।
जो छोड़ दे यह घातक जाल,
स्वस्थ रहेगा उसका हर साल।”