हंसी-हंसी में सिस्टम की पोल खोल गया ‘जामुन का पेड़’

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जिम्मेदारी से बचते अधिकारियों और फाइलों में उलझे तंत्र पर करारा व्यंग्य, बुजुर्ग कलाकारों ने बटोरी सराहना
उदयपुर, 1 नवंबर:
एक इंसान पेड़ के नीचे दबा जिंदगी और मौत से जूझता रहा, लेकिन उसे बचाने के बजाय सरकारी अधिकारी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहे। प्रशासनिक व्यवस्था की इसी विडंबना को हास्य और व्यंग्य के माध्यम से मंच पर जीवंत किया गया नाटक ‘जामुन का पेड़’ में। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के तहत रविवार को शिल्पग्राम स्थित दर्पण सभागार में इसका मंचन हुआ।
उर्दू के प्रसिद्ध अफसानानिगार स्वर्गीय कृष्ण चंदर की कालजयी कहानी पर आधारित नाटक का लेखन नीरज गोस्वामी तथा निर्देशन ईश्वर दत्त माथुर ने किया। रंग शिल्प नाट्य समिति, जयपुर के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। नाटक की खासियत यह रही कि करीब 70 प्रतिशत कलाकारों की उम्र 70 वर्ष के आसपास थी।
कहानी में सचिवालय परिसर में जामुन का पेड़ गिरने से एक आम व्यक्ति उसके नीचे दब जाता है। उसे बचाने के बजाय अधिकारी जिम्मेदारी से बचते हुए एक-दूसरे पर दोष मढ़ते हैं। आम जनता और विपक्षी नेता भी इस स्थिति का अपने हित में इस्तेमाल करते नजर आते हैं। व्यवस्था पर चोट करता यह व्यंग्य दर्शकों को हंसाने के साथ सोचने पर मजबूर कर गया। खचाखच भरे सभागार में प्रस्तुति को खूब सराहना मिली। सिद्धांत भटनागर ने प्रकाश व्यवस्था संभाली। अंत में कलाकारों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में केंद्र के उपनिदेशक पवन अमरावत, हेमंत मेहता सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे। संचालन दुर्गेश चांदवानी ने किया।