विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल हो महाराणा प्रताप की जीवनगाथा : डॉ. प्रदीप कुमावत

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‘राष्ट्रीय स्वाभिमान दिवस’ समारोह में विद्यार्थियों को जोड़ा शौर्य और राष्ट्रभक्ति से
उदयपुर, 9 मई:
आलोक संस्थान सेक्टर-11 में आयोजित दो दिवसीय “राष्ट्रीय स्वाभिमान दिवस” समारोह का शनिवार को भव्य समापन हुआ। समारोह में शिक्षाविद एवं आलोक संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमावत ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के स्वाभिमान, त्याग और स्वतंत्रता चेतना के प्रतीक हैं। उनकी जीवनगाथा को विद्यालयी पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
डॉ. कुमावत ने बताया कि आलोक संस्थान के सभी विद्यालयों में महाराणा प्रताप पर आधारित पाठ्यपुस्तक को औपचारिक रूप से लागू कर परीक्षा प्रणाली से भी जोड़ा गया है। उन्होंने राज्य सरकार से राजस्थान के सभी विद्यालयों में महाराणा प्रताप की प्रेरणादायी जीवनगाथा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की।
9 मई को ‘राष्ट्रीय स्वाभिमान दिवस’ मनाने की पहल
डॉ. कुमावत ने कहा कि तिथि अनुसार प्रताप जयंती जून में आती है, जब विद्यालयों में अवकाश रहता है। इसी कारण विद्यार्थियों को प्रताप के आदर्शों से जोड़ने के उद्देश्य से 9 मई को “राष्ट्रीय स्वाभिमान दिवस” मनाने की शुरुआत की गई है।
कार्यक्रम में करीब 500 विद्यार्थियों ने प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भाग लिया। इस दौरान महाराणा प्रताप का दुग्धाभिषेक किया गया तथा डॉ. कुमावत द्वारा रचित नई आरती का लोकार्पण भी हुआ। समारोह में विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों को “शौर्यगाथा : महाराणा प्रताप” पुस्तक भेंट कर इसे विद्यालयी पाठ्यक्रम से जोड़ने का आग्रह किया गया।