वर्ष प्रतिपदा उत्सव: उदयपुर में हर इकाई पर दिखा राष्ट्रभाव और अनुशासन
वर्ष प्रतिपदा पर संघ का आह्वान: पंच परिवर्तन से होगा समाज जागरण
वर्ष प्रतिपदा उत्सव उदयपुर महानगर में उत्साहपूर्वक सम्पन्न
उदयपुर, 20 मार्च। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला वर्ष प्रतिपदा उत्सव इस वर्ष उदयपुर महानगर में विशेष स्वरूप में आयोजित किया गया। संघ दृष्टि से उदयपुर को महानगर का स्वरूप देते हुए इसे कुल 11 इकाइयों में विभाजित किया गया है, जिसमें 9 नगर एवं 2 ग्रामीण खंड शामिल हैं। इस बार उत्सव सामूहिक रूप से न होकर प्रत्येक इकाई स्तर पर आयोजित किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर अधिक व्यापक सहभागिता देखने को मिली।
उत्सव के अंतर्गत माधव नगर, केशव नगर, समर्थ गुरु नगर, हारीत नगर, बप्पा रावल नगर, छत्रपति शिवाजी नगर, विवेकानन्द नगर, सावरकर नगर एवं रामकृष्ण नगर सहित एकलिंग खंड एवं झामेश्वर खंड के विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हुए। सभी स्थानों पर स्वयंसेवकों, नागरिकों एवं मातृशक्ति की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रमों में विभिन्न वक्ताओं ने नववर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता और प्राचीन परंपरा का महत्व बताया। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष प्रतिपदा केवल एक नववर्ष नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और आत्मगौरव का प्रतीक है। इसी क्रम में क्षेत्र सेवा प्रमुख शिवलहरी द्वारा भारतीय कालगणना के महत्व को समझाते हुए बताया गया कि यह प्रकृति आधारित एवं वैज्ञानिक दृष्टि से पूर्णतः सटीक प्रणाली है, जो हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करती है।
समर्थ गुरु नगर के कार्यक्रम में क्षेत्र प्रचारक प्रमुख श्रीवर्धन ने समाज की सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि देश की सीमाएं सुरक्षित हैं, सेना सतर्क है, लेकिन समाज की आंतरिक सुरक्षा और संस्कारों की रक्षा का दायित्व स्वयं समाज को ही निभाना होगा। उन्होंने स्वयंसेवकों से सामाजिक समरसता, जागरूकता एवं संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।
वीर सावरकर नगर में कार्यक्रम की अध्यक्षता बलिदानी अभिनव नागोरी के माता-पिता सुशीला देवी एवं धर्मचंद्र नागौरी द्वारा की गई।
सह प्रांत प्रचारक डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. हेडगेवार के संकल्प और संघर्ष का प्रतिफल है कि आज संघ ने अपने 100 वर्ष पूर्ण किये है और यह ऐसा समय है जब सम्पूर्ण विश्व भारत की ओर निहार रहा है।
उन्होंने पंच परिवर्तन से समाज जागरण एवं जन जन तक पहुँचाने का संकल्प कराया, उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि स्व के भाव के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति गौरव की भावना जागृत करना, सामाजिक समरसता में सभी वर्गों के बीच समानता, सद्भाव को स्थापित करना, पर्यावरण का संरक्षण करना, केवल पौधा ही नहीं लगाना अपितु लगाने के बाद उनका संरक्षण भी करना। कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से परिवार में संस्कार एवं नागरिक कर्तव्य से नागरिकों को राष्ट्रहित में अपने दायित्वों का बोध कराना है।
कार्यक्रम में नगर संघचालक पवन एवं विभाग संघचालक हेमेन्द्र श्रीमाली की गरिमामयी उपस्थिति रही।
छत्रपति शिवाजी नगर में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारा की गई, जिसमें बौद्धिक डॉ. पुष्कर लोहार ने दिया। कार्यक्रम में संघचालक प्रकाश फुलानी उपस्थित रहे तथा विशेष रूप से शारीरिक एवं घोष का सामूहिक प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा।
माधव नगर में कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. प्रवीण यादव ने की, जबकि बौद्धिक नारायण द्वारा दिया गया। संघचालक हीरालाल सोनी की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ।
बप्पा रावल नगर में अध्यक्षता श्रीमती डॉ. राजश्री गांधी वर्मा ने की। बौद्धिक नारायण द्वारा प्रस्तुत किया गया तथा संघचालक अरविन्द मराठा रहे। इस अवसर पर नई टोली द्वारा उत्सव की व्यवस्था विशेष रूप से सराहनीय रही।
रामकृष्ण नगर में अध्यक्षता अखिलेश जोशी, बौद्धिक श्रीवर्धन एवं संघचालक रामेश्वर आमेटा की उपस्थिति रही। एकलिंग खंड के नाई ग्राम में महानगर सहकार्यवाह राहुल राठौड़, सुराणा ग्राम में विभाग घुमंतू कार्य प्रमुख पंकज, विवेकानंद नगर में महानगर कार्यवाह विष्णु शंकर नागदा, केशव नगर डॉ. भारत भूषण ओझा का बौद्धिक रहा।
अंत में सभी जगह आद्य सरसंघचालक प्रणाम के समय घोष दल ने ‘केशवः’ रचना का वादन किया और ध्वजारोहण के समय घोष दल ने ‘ध्वजारोपणम्’ रचना का वादन किया। इसके बाद ध्वज प्रणाम के साथ घोष दल ने भी ‘ध्वज प्रणाम’ रचना का वादन किया। कार्यक्रम में अवतरण व काव्यगीत की भी प्रस्तुति हुई। प्रार्थना के बाद घोष दल के ‘ध्वजावतरण’ रचना के वादन के साथ ध्वजावतरण हुआ। कार्यक्रम में संघ की गणवेशधारी स्वयंसेवकों के साथ शहर के गणमान्य नागरिक व मातृशक्ति भी उपस्थित थीं। पंच प्रण पर आधारित रंगोली भी आकर्षण का केन्द्र रही।