दंगाइयों से पुलिस को बचाने वाली ढाल अब बनी पौधों की सुरक्षा का कवच

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अनूठी पहल: चित्तौड़गढ़ पुलिस ने 10 साल से कबाड़ में पड़ी 125 लकड़ी की ढालों का ट्री-गार्ड के रूप में किया पुन: उपयोग
उदयपुर, 29 जून:
चित्तौड़गढ़ पुलिस ने पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के पुन: उपयोग का अनूठा उदाहरण पेश किया है। कानून-व्यवस्था और दंगों के दौरान पथराव से पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की ढालें अब नन्हे पौधों की सुरक्षा का कवच बन गई हैं। वर्षों से पुलिस लाइन के स्टोर में कबाड़ के रूप में पड़ी करीब 125 लकड़ी की ढालों का उपयोग ट्री-गार्ड के रूप में किया गया है।
करीब दो-तीन माह पहले पुलिस लाइन स्थित हेलीपैड ग्राउंड के पास 100 से अधिक छायादार और फूलदार पौधे लगाए गए थे। पौधे छोटे होने के कारण उन्हें तेज धूप, हवा और मवेशियों से बचाने के लिए ट्री-गार्ड की आवश्यकता थी। ऐसे में तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में पुलिस लाइन ने कबाड़ से जुगाड़ की तर्ज पर इन अनुपयोगी ढालों का रचनात्मक उपयोग करने का निर्णय लिया।
पुलिस लाइन के रिजर्व इंस्पेक्टर अनिल पांडेय ने बताया कि ये ढालें पिछले करीब 10 वर्षों से स्टोर में बेकार पड़ी थीं। विभाग द्वारा नाकारा घोषित किए जाने के बाद इनका कोई उपयोग नहीं हो रहा था। अब इन्हें पौधों के चारों ओर लगाकर सुरक्षा कवच तैयार किया गया है, जिससे पौधों को सुरक्षित वातावरण मिल रहा है।
लकड़ी से बनी होने के कारण इन ढालों के बीच से पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पानी मिलता रहता है, जिससे उनकी वृद्धि भी प्रभावित नहीं होती। इस पहल से नए लोहे या प्लास्टिक के ट्री-गार्ड खरीदने पर होने वाला सरकारी खर्च भी बच गया है और कबाड़ का सार्थक पुन: उपयोग संभव हो सका है।
चित्तौड़गढ़ पुलिस की इस पर्यावरण हितैषी पहल की शहर में सराहना हो रही है। यह पहल न केवल हरित अभियान को मजबूती दे रही है, बल्कि यह भी संदेश दे रही है कि अनुपयोगी संसाधनों का नवाचार के साथ उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।