उदयपुर, 18 मई: यहां हिरणमगरी सेक्टर 8 के चंद्रशेखर महादेव मन्दिर परिसर में सैकड़ों भक्तिगणों की उपस्थिति में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन वृन्दावन धाम तीतरडी के पीठाधीश्वर श्रीकृष्णनंदजी महाराज ने “कपिल मुनि, वराह भगवान तथा सृष्टि की उत्पत्ति” के गूढ रहास्यों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण में सृष्टि की उत्पत्ति, वराह भगवान और कपिल मुनि की कथा आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। इन सभी का वर्णन भागवत के तृतीय स्कंध में विस्तार से मिलता है। सृष्टि की उत्पत्ति सनातन परंपरा के अनुसार, सृष्टि का निर्माण भगवान विष्णु की इच्छा और उनकी माया से हुआ है। महत्तत्व व पंचमहाभूत: सृष्टि के आरंभ में भगवान की शक्ति से ‘महत्तत्व’ (प्रकृति का मूल रूप) उत्पन्न हुआ, जिससे अहंकार और फिर आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी (पंचमहाभूत) बने। इन्हीं तत्वों से जीवों की इंद्रियां और अंतःकरण विकसित हुए, जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड और जीवों का विस्तार हुआ। वराह भगवान जब सृष्टि के आरंभ में प्रलय के कारण पृथ्वी रसातल (पाताल लोक) में चली गई, तब सृष्टि के संतुलन और पृथ्वी के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने अपना तीसरा अवतार वराह रूप (दिव्य सूअर) लिया। दैत्यराज हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया था। भगवान वराह ने पाताल जाकर हिरण्याक्ष का वध किया और अपनी दाढ़ पर पृथ्वी को स्थापित कर उसे पुनः समुद्र के ऊपर स्थापित किया।कपिल भगवान सृष्टि के विस्तार के बाद, ज्ञान के प्रसार के लिए भगवान विष्णु ने कपिल मुनि के रूप में अवतार लिया। इनका जन्म ब्रह्माजी के मानस पुत्र कर्दम ऋषि और स्वयंभुव मनु की पुत्री देवहुति के घर हुआ था। भगवान कपिल ने ही अपनी माता देवहुति को सांख्य दर्शन का ज्ञान दिया था। सांख्य दर्शन संसार की उत्पत्ति, प्रकृति (जड़) और पुरुष (आत्मा) के भेद को स्पष्ट करता है, जिसके अनुसार यह संसार विकासवादी प्रक्रिया से उत्पन्न हुआ है। वराह भगवान भौतिक सृष्टि (पृथ्वी) की रक्षा और संतुलन का प्रतीक हैं और कपिल भगवान आध्यात्मिक सृष्टि के रहस्य व मोक्ष के प्रदाता हैं। कथा के दौरान अनेक मार्मिक प्रसंगों पर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे। इस संगीतमय कथा के संयोजक चंद्रशेखर महादेव समिति के अध्यक्ष दिनेश अग्रवाल ने कथा श्रवण के लिए आए समस्त श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। लोकेश मेनारिया, डी आर शर्मा, एम डी व्यास, रमेश चन्द्र गौड, मोतीलाल मेनारिया, प्रकाश चन्द्र इंटोड़िया, अशोक सांवला आदि पदाधिकारियों का व्यवस्थाओं मे विशेष सहयोग रहा।