जल ग्रहण विभाग भी कराएगा थर्ड पार्टी जांच

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आसपुर चेकडैम मामले का फॉलोअप: 50 लाख के 21 कार्यों में बिना टेंडर काम और आधे भुगतान पर उठे सवाल
जुगल कलाल
डूंगरपुर, 10 अगस्त:
आसपुर वन क्षेत्र में करीब 50 लाख रुपए की लागत से 21 कच्चे चेकडैम (MPT) और सीपीटी कार्यों को कथित रूप से बिना टेंडर करवाने और करीब आधा भुगतान किए जाने के मामले में अब जांच की प्रक्रिया तेज हो गई है। पंजाब केसरी में खबर प्रकाशित होने के बाद मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा है। जयपुर स्तर से पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है। वहीं मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत वन विभाग को कार्यकारी एजेंसी बनाने वाला जल ग्रहण विभाग भी थर्ड पार्टी जांच कराने की तैयारी में है।
21 कार्यों में टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
जांच में प्रमुख रूप से यह देखा जाएगा कि आसपुर रेंज में 21 कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं, कार्य शुरू कराने के आदेश किसने दिए, एमबी (मेजरमेंट बुक) किसने भरी और भुगतान किस आधार पर स्वीकृत हुआ। आरोप है कि कार्य बिना टेंडर प्रक्रिया के करवाए गए और एमबी तैयार होने के बाद करीब आधे भुगतान की प्रक्रिया भी पूरी कर दी गई।
गुणवत्ता से लेकर भुगतान तक होगी जांच
जल ग्रहण विभाग के एसी मूलाराम सोलंकी ने कहा कि वन क्षेत्रों में कार्य वन विभाग के माध्यम से करवाए जाते हैं और बजट कार्यकारी एजेंसी को भेजा जाता है। यदि कार्य में गड़बड़ी हुई है तो थर्ड पार्टी से जांच करवाई जाएगी। इससे निर्माण की गुणवत्ता, वास्तविक लागत, एमबी, भुगतान और संबंधित रिकॉर्ड की मौके पर जांच की उम्मीद है।
दूसरे रेंज भी जांच के दायरे में?
आसपुर के बाद वेड़, भगागंड और लक्ष्मणपुर सहित अन्य क्षेत्रों में हुए कार्यों पर भी सवाल उठ रहे हैं। पूर्व में आंतरी, बिछीवाड़ा और सागवाड़ा रेंज के कार्यों में भी अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। अब सबकी नजर तथ्यात्मक रिपोर्ट और थर्ड पार्टी जांच पर है। जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई और राशि की रिकवरी का रास्ता खुल सकता है।