संरक्षण के बजाय चारों ओर खड़े हुए निर्माण, तालाब की पाल तक नजर नहीं आती; यूडीए-नगर निगम की भूमिका पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
उदयपुर, 9 अगस्त: उदयपुर के ऐतिहासिक जलस्रोतों के संरक्षण के दावों के बीच मण्डोपा तालाब की बदहाल स्थिति ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रॉयल राज विलास के पीछे स्थित यह तालाब कभी आसपास की पहाड़ियों से आने वाले वर्षाजल के संग्रहण का महत्वपूर्ण केंद्र था, लेकिन अब कचरे, मलबे और निर्माणों के बीच इसका अस्तित्व सिमटता नजर आ रहा है। तालाब के आसपास बाउंड्री वॉल और बड़ी इमारतें बन चुकी हैं। हालात यह हैं कि कई हिस्सों में तालाब की पाल तक स्पष्ट नजर नहीं आती।
निर्माणों की अनुमति पर उठे सवाल
नजदीकी शोभागपुरा के कन्हैयालाल डांगी ने तालाब के आसपास हुए निर्माणों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा, इन्हें अनुमति किस स्तर पर मिली और संबंधित विभागों ने समय रहते निगरानी क्यों नहीं की। यदि किसी निर्माण से तालाब की सीमा, कैचमेंट या प्राकृतिक जलप्रवाह प्रभावित हुआ है तो इसकी जांच आवश्यक है। यूडीए और नगर निगम की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
राजस्व रिकॉर्ड और कैचमेंट की जांच की मांग
मण्डोपा तालाब की वास्तविक सीमा, पाल, कैचमेंट क्षेत्र और पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की जा रही है। साथ ही वर्षों के दौरान हुए निर्माणों की अनुमति और उनकी वैधानिकता की भी जांच होनी चाहिए।
मलबा हटाकर पुनर्जीवन की मांग
इस मुद्दे पर कई लोगों से बात की गई। ज्यादातर युवाओं को तालाब के बारे में जानकारी ही नहीं थी। बुजुर्ग और शोभागपुरा तथा रूपसागर रोड पर रहने वाले कुछ ही लोगों को इस तालाब को लेकर जानकारी थी। हालांकि सभी ने तालाब की सीमाओं का मौके पर पुनः सीमांकन कर अतिक्रमण और मलबा हटाए जाने की पैरवी की। उनका कहना था कि तालाब के पुनर्जीवन को लेकर कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए। इस मामले में उदयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से उनका पक्ष जानना चाहा लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।