मोखाण पधारकर शोक संतप्त परिवार को दी सांत्वना, 155 वर्ष पुरानी परंपरा में निभाया रंग-बदलाई दस्तूर
उदयपुर, 18 अगस्त: मेवाड़ की राजपरंपरा में राजपरिवार और प्रमुख सहयोगी परिवारों के बीच सुख-दुःख में सहभागी होने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसी ऐतिहासिक परंपरा का निर्वहन करते हुए मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ मंगलवार को उदयपुर स्थित बडलिया हवेली में मोखाण पधारे। उन्होंने स्वर्गीय राव बख्तावर सिंह जी के प्रपौत्र राव गजेन्द्र सिंह जी की धर्मपत्नी के निधन पर परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
परिवार को दिया संबल, पान बीड़ा देकर निभाई परंपरा
डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने राव गजेन्द्र सिंह एवं उनके सुपुत्र राव अक्षय सिंह से मुलाकात कर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी और शोक की घड़ी में परिवार को धैर्य बंधाया। उन्होंने परिवार के सदस्यों को पान बीड़ा देकर परंपरा का निर्वहन किया।
ऐतिहासिक बहियों में दर्ज है मोखाण की परंपरा
ऐतिहासिक बहियों में कविराव परिवार की हवेली पर मेवाड़ के महाराणाओं के मोखाण पधारने के उल्लेख मिलते हैं। 13 जुलाई 1871 को महाराणा शम्भूसिंह, 22 अप्रैल 1894 को महाराणा फतहसिंह और वर्ष 1964 में महाराणा भगवतसिंह भी इस परिवार के शोक प्रसंगों में मोखाण पधारे थे। वर्ष 2026 में डॉ. लक्ष्यराज सिंह का पहुंचना इसी परंपरा की निरंतरता माना गया।
रंग-बदलाई दस्तूर भी निभाया
समारोह में 155 वर्ष पुरानी रंग-बदलाई परंपरा का भी निर्वहन हुआ। डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने राव नरेन्द्र सिंह को रंग की पाग पहनाई। शास्त्रीजी ने राव गजेन्द्र सिंह, राव महेंद्र सिंह और राव अक्षय सिंह को रंग की पाग पहनाई। श्रीजी हुजूर ने परिवार के सदस्यों को सरोपाव भी प्रदान किए।