डाक सेवाओं के प्रचार-प्रसार, वित्तीय समावेशन, ग्राहक जागरूकता एवं आधुनिक डाक सुविधाओं को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से होंगे विभिन्न आयोजन
उदयपुर, 9 अक्टूबर। भारतीय डाक विभाग द्वारा प्रतिवर्ष 09 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय डाक सप्ताह का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में उदयपुर डाक मंडल द्वारा 09 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न जनजागरूकता, ग्राहक संपर्क, वित्तीय साक्षरता एवं व्यवसाय संवर्धन संबंधी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रवर अधीक्षक डाकघर, उदयपुर मंडल के निर्देशन में आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों का उद्देश्य आमजन, व्यापारियों, उद्यमियों, निर्यातकों, विद्यार्थियों तथा विभिन्न व्यावसायिक संस्थानों को भारतीय डाक विभाग की पारंपरिक एवं आधुनिक सेवाओं से अवगत कराना तथा डाक विभाग के प्रति जनविश्वास को और अधिक सुदृढ़ करना है।
डाक मण्डल के प्रवर अधीक्षक ने बताया कि भारतीय डाक विभाग आज केवल पत्रों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्सल एवं लॉजिस्टिक्स, स्पीड पोस्ट, पंजीकृत डाक, डाकघर बचत योजनाओं, डाक जीवन बीमा, ग्रामीण डाक जीवन बीमा, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक तथा विभिन्न डिजिटल एवं वित्तीय सेवाओं के माध्यम से आमजन और व्यापार जगत को व्यापक सुविधाएँ उपलब्ध करा रहा है। राष्ट्रीय डाक सप्ताह इन सेवाओं की जानकारी जन-जन तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण अवसर है।
09 अक्टूबर ; विश्व डाक दिवस एवं डाक सेवाओं का प्रचार-प्रसार
राष्ट्रीय डाक सप्ताह का शुभारंभ विश्व डाक दिवस के अवसर पर किया जाएगा। इस दिन बैनर, पोस्टर, डिजिटल डिस्प्ले तथा अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए डाक विभाग की विभिन्न सेवाओं की जानकारी आमजन तक पहुँचाई जाएगी। डाकघरों में आने वाले ग्राहकों को स्पीड पोस्ट, पार्सल बुकिंग, पंजीकृत डाक, व्यवसायिक डाक सेवाओं एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में जागरूक किया जाएगा। सोशल मीडिया तथा अन्य उपलब्ध संचार माध्यमों का उपयोग करते हुए भी डाक सेवाओं का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
12 अक्टूबर: डाक टिकट प्रदर्शनी एवं ढाई आखर पत्र लेखन प्रतियोगिता
इस दिन डाक टिकटों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक महत्व को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से डाक टिकट प्रदर्शनी तथा ढाई आखर पत्र लेखन प्रतियोगिता से संबंधित गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं युवाओं में पत्र लेखन की परंपरा, रचनात्मक अभिव्यक्ति तथा डाक टिकट संग्रह के प्रति रुचि विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। डाक टिकटों के माध्यम से देश की संस्कृति, इतिहास, महापुरुषों एवं महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी भी प्रदान की जाएगी।
13 अक्टूबर: वित्तीय साक्षरता एवं डाकघर बचत योजनाओं का प्रचार
राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अंतर्गत 13 अक्टूबर को मुख्य एवं उपमंडलीय डाकघरों में डाकघर बचत योजनाओं के संबंध में जागरूकता गतिविधियाँ एवं सूचना शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में ग्राहकों को उपलब्ध योजनाओं, खाते खोलने की प्रक्रिया, जमा एवं निकासी संबंधी सुविधाओं तथा पात्रता एवं लागू नियमों के अनुसार उपलब्ध वित्तीय सेवाओं की जानकारी दी जाएगी।
डाकघर बचत खाते, आवर्ती जमा, सावधि जमा, मासिक आय योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र तथा अन्य लागू बचत योजनाओं के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य आमजन में नियमित बचत की आदत विकसित करना तथा वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहित करना है।
14 अक्टूबर: व्यापारियों एवं उद्यमियों के साथ संवाद और बिजनेस मीट
व्यापार एवं व्यवसाय संवर्धन की दृष्टि से 14 अक्टूबर को व्यापारियों, उद्यमियों, निर्यातकों तथा विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद एवं बिजनेस मीट आयोजित करने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस दौरान डाक विभाग की स्पीड पोस्ट, पार्सल एवं लॉजिस्टिक्स सेवाओं, बल्क मेलिंग, बिजनेस पोस्ट तथा पात्रता एवं लागू शर्तों के अनुसार उपलब्ध बल्क ग्राहक एवं बिलिंग सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। व्यापारियों एवं उद्यमियों को उनके व्यवसाय की आवश्यकताओं के अनुरूप डाक सेवाओं के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
विशेष रूप से हस्तशिल्प, मार्बल एवं मार्बल हस्तशिल्प उत्पादों, कृत्रिम आभूषणों, परिधानों तथा मेवाड़ क्षेत्र के अन्य स्थानीय उत्पादों से जुड़े व्यापारियों और निर्यातकों को उनके उत्पादों की देश के विभिन्न भागों तक सुरक्षित एवं सुविधाजनक पहुँच के लिए उपलब्ध डाक सेवाओं की जानकारी प्रदान करने पर जोर दिया जाएगा।
इस पहल से स्थानीय व्यापारियों एवं उद्यमियों को डाक विभाग के साथ व्यावसायिक संबंध स्थापित करने तथा अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा।
15 अक्टूबर: आधुनिक डाक सेवाओं का प्रदर्शन, तकनीकी प्रश्नोत्तरी एवं कार्यशाला
राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अंतिम दिन आधुनिक डाक सेवाओं एवं तकनीकी सुविधाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदर्शन, तकनीकी प्रश्नोत्तरी तथा कार्यशाला संबंधी गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।
इन गतिविधियों के अंतर्गत ग्राहकों को स्पीड पोस्ट एवं पार्सल बुकिंग, डाक वस्तुओं की ट्रैकिंग, उपलब्ध डिजिटल सुविधाओं, ऑनलाइन सेवाओं तथा डाक विभाग की अन्य आधुनिक सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, ग्राहकों की शंकाओं का समाधान करने और कर्मचारियों को सेवाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
जनसंपर्क एवं व्यवसाय संवर्धन पर रहेगा विशेष जोर
राष्ट्रीय डाक सप्ताह के दौरान उदयपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले डाकघरों में ग्राहक संपर्क अभियान, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से संवाद, बचत योजनाओं के प्रचार तथा डाक सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
डाक विभाग की व्यावसायिक भूमिका
वर्तमान समय में भारतीय डाक विभाग देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पारंपरिक डाक सेवाओं के साथ आधुनिक लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स पार्सल वितरण, वित्तीय सेवाओं एवं डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से विभाग आम नागरिकों और व्यवसाय जगत के लिए एक महत्वपूर्ण सेवा प्रदाता के रूप में कार्य कर रहा है। उदयपुर मंडल द्वारा राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अंतर्गत किए जाने वाले ये प्रयास ग्राहक संतुष्टि, सेवा गुणवत्ता, वित्तीय जागरूकता तथा व्यवसाय संवर्धन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण होंगे।
प्रवर अधीक्षक डाकघर, उदयपुर मंडल ने आमजन, व्यापारियों, उद्यमियों, विद्यार्थियों एवं सभी संबंधित हितधारकों से राष्ट्रीय डाक सप्ताह के कार्यक्रमों में सहभागिता करने तथा भारतीय डाक विभाग की विभिन्न सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि डाक विभाग का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक तक विश्वसनीय, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ पहुँचाना है। ग्राहक-केंद्रित कार्यप्रणाली, तकनीकी नवाचार, वित्तीय समावेशन तथा व्यापारिक संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय के माध्यम से डाक सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
पीएम श्री राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, भीलवाड़ा लखावली में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम आयोजित
उदयपुर, 9 अक्टूबर। पीएम श्री राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, भीलवाड़ा लखावली में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण एवं विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास के उद्देश्य से एक विशेष प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 250 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रकार के पौधे एवं वृक्ष लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नेशनल प्रेसिडेंट, कंज्यूमर राइट्स ऑर्गेनाइजेशन राजश्री गांधी, तथा अध्यक्ष, रोटरी युवा संगीता शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में भारतीय डाक विभाग के मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव उमेश निमावत सहित विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रमिला पटेल, चंदा पालीवाल, संजीवनी निमावत, वर्षा पालीवाल, मोनिका सांखला, कल्पना जोशी, राजकुमारी पानेरी एवं अन्य विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों, अतिथियों एवं विद्यालय स्टाफ ने मिलकर विद्यालय परिसर में पौधारोपण किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए पौधों की देखभाल करने तथा प्रकृति को हरा-भरा बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा।
मुख्य अतिथि राजश्री गांधी ने अपने प्रेरक संबोधन में पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं। पेड़-पौधे न केवल हमें स्वच्छ वायु और स्वस्थ वातावरण प्रदान करते हैं, बल्कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव भी रखते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा, अनुशासन, अच्छे संस्कार तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि बच्चों में बचपन से ही प्रकृति के प्रति प्रेम, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना आवश्यक है।
इस अवसर पर संगीता शर्मा एवं उमेश निमावत सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने अनुशासन, नैतिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सहभागिता तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं और विद्यार्थियों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। अतिथियों ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार, संस्कारवान एवं संवेदनशील नागरिक बनना भी है।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रमिला पटेल एवं समस्त स्टाफ ने कार्यक्रम में सहभागिता निभाते हुए विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस सामूहिक पौधारोपण कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में सहयोग, सेवा, प्रकृति प्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित किया।
पीएम श्री राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, भीलवाड़ा लखावली में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम आयोजित
प्रत्याशी प्रबोधन कार्यशाला 10 को
उदयपुर, 9 अक्टूबर। पंचायतीराज आम चुनाव-2026 के तहत प्रत्याशियों एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को नामांकन प्रक्रिया और निर्वाचन संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी देने के लिए 10 अक्टूबर को प्रत्याशी प्रबोधन कार्यशाला जिला परिषद सभागार में शाम 4 बजे आयोजित की जाएगी।
जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव अग्रवाल ने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान, जयपुर के निर्देशानुसार आयोजित की जा रही इस कार्यशाला कार्यशाला का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी उपलब्ध कराना और संभावित प्रत्याशियों को नामांकन संबंधी दिशा-निर्देशों से अवगत कराना है। कार्यशाला में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि तथा संभावित प्रत्याशियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।
भील जनजाति की चित्रकला एवं कला कार्यशाला का शुभारंभ
उदयपुर, 9 अक्टूबर। माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआई) द्वारा जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से जनजातीय विरासत, जनजातीय कलारूपों, मौखिक परंपराओं तथा विभिन्न जनजातीय भित्ति चित्र एवं माण्डना कला के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और संवर्धन के उद्देश्य से स्पोर्ट टू टीआरआई कार्यक्रम के तहत भील जनजाति के लिए ‘स्टेट लेवल ट्राइबल चित्रकला एवं कला कार्यशाला’ का शुभारंभ शुक्रवार, 9 अक्टूबर को सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) सभागार में किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की संयुक्त शासन सचिव मंजू मार्शल के मुख्य आतिथ्य एवं वरिष्ठ कला विशेषज्ञ तथा मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष शैल चोयल की अध्यक्षता में हुआ।
संस्थान के निदेशक ओ.पी. जैन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनजातीय विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे विभागीय प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा कलाकारों की कलाकृतियों को उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से बनफूल डिजाइन स्टूडियो की स्थापना की गई है। इसके साथ ही विभिन्न कलाओं के प्रशिक्षण तथा आपसी आदान-प्रदान के माध्यम से सीखने के लिए समय-समय पर विविध कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जा रहा है।
श्री जैन ने बताया कि इस कार्यशाला में राजस्थान के विभिन्न जिलों के कलाकार अपनी क्षेत्रीय कला शैलियों का प्रदर्शन करेंगे। इसके माध्यम से कलाकारों को अपने-अपने क्षेत्र की जनजातीय कला, विचारों एवं रचनात्मकता का आदान-प्रदान करने का अवसर मिलेगा। कार्यशाला का उद्देश्य जनजातीय कला की विविध शैलियों को प्रोत्साहित करने के साथ ही पारंपरिक कलात्मक विरासत को संरक्षित करना और कलाकारों के बीच आपसी संवाद एवं सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मंजू मार्शल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा आदिवासी विरासत के संरक्षण के लिए पूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से विभाग द्वारा ‘सौंध माटी’ आदि धरोहर प्रलेखन योजना प्रारंभ की गई है। इस प्रकार की पहल जनजातीय विरासत को संरक्षित करने तथा उसे दस्तावेजों के माध्यम से आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शैल चोयल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर एक कलाकार होता है। आदिवासी चित्रकला में भित्ति चित्र और माण्डना जनजातीय समुदायों की प्राचीनतम कला अभिव्यक्तियों में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि माण्डना कला, जिसे मुख्य रूप से देश की जनजातियों द्वारा घरों के आंगन और दीवारों पर बनाया जाता है, केवल सजावट का माध्यम नहीं है, बल्कि यह शुभता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक भी है। उन्होंने कलाकारों से अपनी कला का स्वाभाविक रूप से प्रदर्शन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित मीरा गर्ल्स कॉलेज के आचार्य राम सिंह भाटी ने कला की मौलिकता पर बल देते हुए सृजनात्मक कला की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कलाकारों को गूगल आदि के शॉर्टकट का सहारा लेने के बजाय अपने आसपास के परिवेश को आधार बनाकर उसे अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता के माध्यम से कलाकृति का रूप देना चाहिए। उन्होंने विभिन्न कला प्रारूपों एवं मेवाड़ की चित्रकला पद्धतियों पर भी गहराई से प्रकाश डाला।
कार्यशाला के माध्यम से भील जनजाति की पारंपरिक चित्रकला एवं अन्य जनजातीय कला रूपों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, संवर्धन और कलाकारों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय लोक अदालत 10 को
उदयपुर, 9 अक्टूबर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार राष्ट्रीय लोक अदालत शनिवार सुबह 10 बजे से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्ञानप्रकाश गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित होगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव राहुल चौधरी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकाधिक राजीनामा योग्य प्रकरणों के निस्तारण हेतु आवश्यक तैयार कर ली गई है। राजस्व न्यायालयों में भी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा । प्रकरणों के निस्तारण के लिये बैंचो का गठन कर लिया गया है ।
राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन से जुड़े धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम, धन वसूली, श्रम एवं नियोजन संबंधी विवाद, बिजली, पानी एवं अन्य बिल भुगतान से संबंधित (अशमनीय के अलावा प्रकरण), भरण-पोषण से संबंधित प्रकरण, राजस्व विवाद, पैमाइश एवं डिवीजन ऑफ होल्डिंग सहित, सिविल विवाद, सर्विस मैटर्स, उपभोक्ता विवाद, अन्य राजीनामा योग्य विवाद (जो अन्य अधिकरणों/आयोगों/मंचो/आथॉरिटी/ प्राधिकारियों के क्षेत्राधिकार से संबधित है ) आदि का निस्तारण किया जाएगा।
इसी प्रकार न्यायालय में लंबित प्रकरण यथा राजीनामा योग्य फौजदारी प्रकरण, धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम (एन. आई. एक्ट ), धन वसूली, एम.ए.सी.टी. के प्रकरण, श्रम एवं नियोजन संबंधी विवाद एवं कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के प्रकरण, बिजली, पानी एवं अन्य बिल भुगतान से संबंधित प्रकरण ( अशमनीय के अलावा ), पारिवारिक विवाद (तलाक को छोड़कर), भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रकरण, सभी प्रकार के सर्विस मैटर्स (पदोन्नति एवं वरिष्ठता विवाद के मामलों के अलावा ) , सभी प्रकार के राजस्व मामले, पैमाइश एवं डिविजन ऑफ हौल्डिंग सहित, वाणिज्यिक विवाद, बैंक के विवाद, गैर सरकारी शिक्षण संस्थान के विवाद, सहकारिता संबधी विवाद, स्थानीय निकाय (विकास प्राधिकरण/नगर निगम, आदि ) के विवाद, रियल स्टेट सम्बधी विवाद, रेलवे क्लेम्स संबधी विवाद, आयकर संबधी विवाद, अन्य कर संबधी विवाद, उपभोक्ता एवं विक्रेता /सेवा प्रदाता के मध्य के विवाद, सिविल मामले ( किरायेदारी, बंटवारा, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा, घोषणा, क्षतिपूर्ति एवं विनिर्दिष्ट पालना के दावेे), अन्रू राजीनामा योग्य ऐसे मामले जो अन्य अधिकरणों/ आयोगों, मंचो/ आथॉरिटी/ प्राधिकारियों के समक्ष लंबित प्रकरणों का भी आपसी समझाइश से निस्तारण किया जाएगा।