बागोर की हवेली में मोहन पटेल की सातवीं चित्रात्मक फोटोग्राफी प्रदर्शनी शुरू, 10 अक्टूबर तक कला प्रेमी कर सकेंगे अवलोकन
उदयपुर, 8 अक्टूबर: तस्वीरें हमेशा वही नहीं कहतीं, जो आंखें देखती हैं। कभी रंग बोलते हैं, कभी रोशनी संवाद करती है और कभी साधारण दृश्य कल्पना की नई दुनिया रच देते हैं। कैमरे की इसी सृजनात्मक क्षमता को सामने लाती वरिष्ठ कलाकार एवं फोटोग्राफर मोहन पटेल की सातवीं चित्रात्मक फोटोग्राफी प्रदर्शनी का गुरुवार को गणगौर घाट स्थित ऐतिहासिक बागोर की हवेली में शुभारंभ हुआ।
गुजरात ललित कला अकादमी के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी, कलाकार एवं फोटोग्राफर दिनेश कोठारी तथा वरिष्ठ फोटो पत्रकार राकेश शर्मा ‘राजदीप’ ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर योगाचार्य सुरेश पालीवाल, डॉ. सुनील निमावत, महेंद्र सिंह गहलोत और सौरभ शर्मा सहित कई कला साधक मौजूद रहे।
प्रदर्शनी में रंग, प्रकाश, छाया और कल्पनाशील संरचनाओं के माध्यम से फोटोग्राफी का ऐसा संसार प्रस्तुत किया गया है, जिसमें कैमरा महज दृश्य दर्ज करने का माध्यम नहीं, बल्कि कलाकार की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने वाली तूलिका बन जाता है।
तस्वीरों में यथार्थ के साथ कल्पना का मेल
प्रदर्शनी की खासियत चित्रात्मक फोटोग्राफी की वह शैली है, जिसमें यथार्थ के साथ कलाकार की कल्पनाशीलता भी आकार लेती है। प्रकाश और छाया का संतुलन, रंगों का संयोजन और दृश्यों की कलात्मक संरचना छायाचित्रों को चित्रकला जैसा प्रभाव देती है। इस तरह फोटोग्राफी और पेंटिंग के बीच की सीमाएं धुंधली होती नजर आती हैं।
पांच दशक की कला साधना का सफर
मोहन पटेल का कला संसार पांच दशक से अधिक की निरंतर साधना का परिणाम है। वर्ष 1968 में माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अहमदाबाद के सीएन कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स से कमर्शियल आर्ट में डिप्लोमा किया। ड्रॉइंग, पेंटिंग और डिजाइन की विधिवत शिक्षा ने उनकी कलात्मक दृष्टि को विस्तार दिया।
अहमदाबाद के शिल्पी डिजाइन स्टूडियो से पेशेवर यात्रा शुरू करने वाले पटेल ने कैडिला फार्मास्यूटिकल्स, शिल्पी एडवरटाइजिंग, मुद्रा कम्युनिकेशंस और वाइब्रेंट एडवरटाइजिंग जैसे संस्थानों में कलाकार, विजुअलाइजर और आर्ट डायरेक्टर के रूप में करीब तीन दशक सेवाएं दीं।
उनकी कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। ललित कला अकादमी, विभिन्न राष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनियों तथा तत्कालीन यूगोस्लाविया के जाग्रेब सैलून में भी उनके छायाचित्र प्रदर्शित हो चुके हैं।
10 अक्टूबर तक देख सकेंगे प्रदर्शनी
प्रदर्शनी 10 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक कला प्रेमियों के लिए खुली रहेगी। आयोजन में दर्शकों को तस्वीरों के माध्यम से रंग, प्रकाश और कल्पना के अनूठे संयोजन को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।