ये दिन मिलेंगे फिर कहां…?

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मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में बचपन भी अब तेजी से स्क्रीन तक सिमटता जा रहा है। ऐसे दौर में गांव-ढाणियों में कहीं-कहीं आज भी वे मासूम पल दिखाई दे जाते हैं, जहां न मोबाइल की चिंता होती है, न महंगे खिलौनों की जरूरत। बस दोस्तों का साथ, थोड़ी शरारत और खिलखिलाती हंसी ही पूरी दुनिया बन जाती है। उदयपुर-डबोक मार्ग पर देबारी के समीप एक ढाणी में कुछ बच्चे ऐसे ही बेफिक्र अंदाज में खेलते-मस्ती करते नजर आए। उनकी निश्छल मुस्कान और सहज उल्लास मानो यही कह रहे थे—बचपन के ये दिन मिलेंगे फिर कहां…? इन खूबसूरत और सुकून भरे पलों को कैमरे में कैद किया वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट राकेश शर्मा ‘राजदीप’ ने।