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रेलवे मेडिकल रीइम्बर्समेंट घोटाला: जोधपुर के गोयल अस्पताल पर CBI का शिकंजा, ₹1.50 करोड़ की फर्जी क्लेमबाजी की जांच

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रेलवे मेडिकल रीइम्बर्समेंट घोटाला: जोधपुर के गोयल अस्पताल पर CBI का शिकंजा, ₹1.50 करोड़ की फर्जी क्लेमबाजी की जांच

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जोधपुर, 1 अगस्त: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी), जोधपुर ने उत्तर पश्चिम रेलवे के मेडिकल रीइम्बर्समेंट घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए गोयल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों, अधिकारियों तथा उत्तर पश्चिम रेलवे के मंडल रेलवे अस्पताल, जोधपुर के अज्ञात लोक सेवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
सीबीआई जांच के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के बीच रेलवे कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों के इलाज के नाम पर करीब 1.50 करोड़ रुपये के फर्जी मेडिकल रीइम्बर्समेंट क्लेम प्रस्तुत किए गए। प्रारंभिक जांच में अस्पताल प्रबंधन और कुछ रेलवे अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
आईसीयू के नाम पर बढ़ाया बिल
जांच में सामने आया कि सामान्य वार्ड में भर्ती मरीजों को रिकॉर्ड में आईसीयू में भर्ती दिखाकर अधिक राशि का दावा किया गया। मरीजों को दिए गए मूल डिस्चार्ज सारांश और रेलवे को प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में भी गंभीर अंतर पाया गया।
दवाओं के फर्जी बिल, रिकॉर्ड में छेड़छाड़
सीबीआई के अनुसार जिन दवाओं का मरीजों को उपयोग ही नहीं कराया गया, उनके भी बिल क्लेम में शामिल किए गए। दवा वितरण चार्ट में बाद में नए पन्ने जोड़ने, पुराने रिकॉर्ड में बदलाव करने तथा एक ही चिकित्सक के अलग-अलग हस्ताक्षरों वाले डिस्चार्ज सारांश मिलने जैसी अनियमितताएं भी सामने आई हैं।
रेलवे से मिले पैसे अस्पताल के खाते में
जांच में पता चला कि रेलवे द्वारा स्वीकृत रीइम्बर्समेंट की राशि जोधपुर के नई सड़क स्थित आईसीआईसीआई बैंक में गोयल हॉस्पिटल के चालू खाते में जमा कराई जाती थी।
गोपनीय सूचना से खुला मामला
3 जनवरी 2026 को प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच (पीई) शुरू की। जांच में यह भी सामने आया कि 17 सितंबर 2022 और 17 सितंबर 2024 को उत्तर पश्चिम रेलवे और अस्पताल के बीच कैशलेस उपचार के लिए हुए एमओयू के बावजूद नियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया।
इन धाराओं में मामला दर्ज
सीबीआई ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी सहित विभिन्न धाराओं तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की विस्तृत जांच सीबीआई एसीबी, जोधपुर के उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) यू.के. शर्मा को सौंपी गई है, जो अस्पताल प्रबंधन, रेलवे अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच करेंगे।

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