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विदेशी शिक्षा का बदलता ट्रेंड: अफॉर्डेबल देशों की ओर बढ़ रहा भारतीय छात्रों का रुझान

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विदेशी शिक्षा का बदलता ट्रेंड: अफॉर्डेबल देशों की ओर बढ़ रहा भारतीय छात्रों का रुझान

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जर्मनी बना पहली पसंद
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 6 जनवरी:
भारतीय छात्रों में विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की चाह लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब यह रुझान परंपरागत देशों से हटकर अफॉर्डेबल और क्वालिटी एजुकेशन देने वाले नए देशों की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहा है। कम ट्यूशन फीस, बेहतर करियर अवसर और वीजा नीतियों में अपेक्षाकृत स्थिरता जैसे कारण छात्रों की पसंद को प्रभावित कर रहे हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उदयपुर से हर साल करीब 1100 छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं। जर्मनी भारतीय विद्यार्थियों की पहली पसंद के रूप में तेजी से उभर रहा है। ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस जैसे तकनीकी कोर्सेज के साथ-साथ अब बिजनेस मैनेजमेंट, हेल्थ केयर और ह्यूमैनिटीज जैसे विषयों के लिए भी छात्र जर्मनी का रुख कर रहे हैं। जर्मनी की पब्लिक यूनिवर्सिटीज में नो ट्यूशन फीस या बेहद कम फीस होना इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
यूरोप और अन्य देशों की ओर बढ़ता झुकाव
आयरलैंड, फ्रांस और न्यूजीलैंड में भारतीय छात्रों के दाखिले में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आयरलैंड फार्मा और आईटी स्टडीज के लिए पसंदीदा बन रहा है, वहीं फ्रांस बिजनेस मैनेजमेंट, फैशन और लग्जरी गुड्स के साथ अफॉर्डेबल आईटी एजुकेशन के लिए आकर्षण का केंद्र है। न्यूजीलैंड को होटल, टूरिज्म मैनेजमेंट और एग्रीकल्चर स्टडीज के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है। इसके अलावा हंगरी, नीदरलैंड, स्वीडन, फिनलैंड, पोलैंड, लातविया, इटली, स्पेन और माल्टा जैसे यूरोपीय देशों में भी न्यूनतम फीस और उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के कारण छात्रों का रुझान बढ़ा है।
एमबीबीएस के लिए नए विकल्प
फॉरेन एजुकेशन कंसल्टेंट्स और विभिन्न एजेंसियों के मुताबिक अकेले एमबीबीएस की डिग्री के लिए उदयपुर से लगभग 500 युवा विदेश जा रहे हैं। परंपरागत रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ अब छात्र रोमानिया, बुल्गारिया, बोस्निया-हर्जेगोविना और सर्बिया जैसे देशों में भी दाखिला ले रहे हैं, जहां बेहतर क्वालिटी एजुकेशन उपलब्ध है।
इन कोर्सेज की सबसे ज्यादा मांग
भारतीय छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और कंप्यूटर साइंस से जुड़े कोर्सेज के लिए सबसे ज्यादा आवेदन कर रहे हैं। इसके साथ ही मेकट्रोनिक्स, एयरोनॉटिकल, मरीन इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, मैनेजमेंट, गेम डेवलपमेंट, फैशन डिजाइनिंग, बायोटेक्नोलॉजी, नर्सिंग, साइकोलॉजी, लॉ और इकोनॉमिक्स जैसे विषयों में भी रुचि बढ़ी है।
वीजा प्रतिबंधों का असर
हाल के वीजा प्रतिबंधों का सबसे अधिक असर कनाडा पर पड़ा है, जहां भारतीय छात्रों के रजिस्ट्रेशन में भारी गिरावट आई है। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी सख्त वीजा नियमों के कारण एनरोलमेंट प्रभावित हुआ है।
एक्सपर्ट व्यू


जेएस ग्लोबल के फाउंडर एवं ख्यातनाम करियर काउंसलर जितेंद्र सिंह का कहना है कि आने वाले वर्षों में विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ती रहेगी, लेकिन देशों की प्राथमिकता बदलेगी। जापान और साउथ कोरिया जैसे देश भी जल्द ही भारतीय छात्रों के नए पसंदीदा गंतव्य बन सकते हैं, वहीं भारत में एमबीबीएस सीटों की कमी के चलते मेडिकल एजुकेशन के लिए विदेश जाने का ट्रेंड और तेज होगा।

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