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एलिवेटेड रोड के लिए 40 पेड़ों को मिली नई जिंदगी, तीन रात में हुआ अनोखा ट्री ऑपरेशन

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एलिवेटेड रोड के लिए 40 पेड़ों को मिली नई जिंदगी, तीन रात में हुआ अनोखा ट्री ऑपरेशन

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उदयपुर, 12 अप्रैल: विकास और पर्यावरण संरक्षण का संतुलन कैसे बनाया जाए, इसका अनोखा उदाहरण उदयपुर में देखने को मिला है। सिटी रेलवे स्टेशन से कलेक्टर बंगले तक बन रही एलिवेटेड रोड के बीच बाधा बन रहे 15 साल पुराने 40 पेड़ों को काटने के बजाय नगर निगम ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर नई जिंदगी दे दी। यह अभियान तीन रातों में पूरा किया गया और अब ये सभी पेड़ नेहरू बाल उद्यान में फिर से लहलहा रहे हैं।
उदयापोल चौराहे जैसे व्यस्त इलाके में यह ऑपरेशन गुरुवार रात से शुरू हुआ और शुक्रवार व शनिवार रात तक चला। रात 11 बजे से 2 बजे के बीच पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से जड़ों सहित निकाला गया। इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने खुद की।
कटने से बचाए लाखों के पेड़
इन 40 पेड़ों में ज्यादातर पाम ट्री शामिल हैं, जिनकी बाजार कीमत 60 से 70 लाख रुपए आंकी गई है। निगम ने महज करीब सवा लाख रुपए खर्च कर इन कीमती पेड़ों को कटने से बचा लिया। आमतौर पर ऐसे निर्माण कार्यों में पेड़ों की कटाई कर दी जाती है, लेकिन इस पहल की शहरभर में सराहना हो रही है।
ट्री एक्सपर्ट की देखरेख में हुआ ऑपरेशन
इस अभियान का नेतृत्व ट्री एक्सपर्ट डॉ. बीएल चौधरी ने किया, जिन्हें पेड़ों का ‘जादूगर’ भी कहा जाता है। उनकी टीम ने पहले पेड़ों के चारों ओर गहरी खुदाई कर जड़ों को सुरक्षित निकाला, फिर क्रेन की मदद से उन्हें ट्रेलर पर रखकर करीब एक किलोमीटर दूर गार्डन तक पहुंचाया। वहां पहले से तैयार गड्ढों में इन्हें दोबारा रोपित किया गया।
136 करोड़ की लागत से बन रहा एलिवेटेड रोड
उदयपुर में 2.7 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड 136 करोड़ रुपए की लागत से तैयार की जा रही है। इस परियोजना में 117 पिलर बनाए जाएंगे, जिनमें से कई उदियापोल चौराहे के बीच स्थापित होंगे। ऐसे में पेड़ों को हटाना जरूरी था, लेकिन निगम ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए उन्हें शिफ्ट करने का निर्णय लिया।नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने कहा कि शहर में विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। उदयपुर जैसे पर्यटन शहर में हरियाली को बचाए रखना प्राथमिकता है। यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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