5 वर्षीय मासूम ने जीती गुलियन-बैरी सिंड्रोम से जंग
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80 दिन पीआईसीयू में चला उपचार, आयुष्मान योजना के तहत 5.31 लाख का इलाज निःशुल्क
उदयपुर, 2 जून: रवीन्द्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के बाल चिकित्सालय ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राजसमंद जिले की 5 वर्षीय बालिका ने दुर्लभ और गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी गुलियन-बैरी सिंड्रोम (जीबीएस) से करीब 90 दिनों के संघर्ष के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर नया जीवन पाया है। बच्ची को दोनों पैरों में कमजोरी की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया था, जहां चिकित्सकों ने समय रहते बीमारी का सटीक निदान कर उपचार शुरू किया।
वेंटिलेटर सपोर्ट और आईवीआईजी थेरेपी बनी जीवनदायिनी
बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल पीआईसीयू में भर्ती किया गया। बीमारी के कारण लंबे समय तक वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी और ईएनटी विभाग द्वारा ट्रेकियोस्टॉमी भी की गई। उपचार के दौरान करीब 40 हजार रुपये प्रति वायल लागत वाली आईवीआईजी दवा की पांच डोज दी गईं, जिनकी कुल कीमत लगभग दो लाख रुपये रही। साथ ही नियमित फिजियोथेरेपी और उच्च प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार ने उसकी रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आयुष्मान योजना से मिला बड़ा सहारा
पूरे उपचार पर 5 लाख 31 हजार 900 रुपये का खर्च आया, जिसे मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया गया। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. राहुल जैन ने इसे अस्पताल की उन्नत क्रिटिकल केयर सुविधाओं और चिकित्सकों की प्रतिबद्धता का परिणाम बताया।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक अरोड़ा और यूनिट हेड डॉ. मोहम्मद आसिफ के नेतृत्व में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल टीम के संयुक्त प्रयासों से बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट गई है।
