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मिड-डे-मील संकट: आदिवासी अंचल के हजारों स्कूलों में थाली सूनी

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मिड-डे-मील संकट: आदिवासी अंचल के हजारों स्कूलों में थाली सूनी

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खाद्यान्न आपूर्ति में देरी से बच्चों के पोषण पर खतरा, सरकार ने तेज किए प्रयास
उदयपुर, 24 मार्च (सुभाष शर्मा):
राजस्थान के आदिवासी अंचल में मिड-डे-मील (प्रधानमंत्री पोषण योजना) की जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। नए शैक्षणिक सत्र से पहले ही डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर और प्रतापगढ़ जिलों के हजारों सरकारी स्कूलों में खाद्यान्न की आपूर्ति बाधित है। हालात यह हैं कि कई स्कूलों में या तो भोजन बंद हो गया है या सीमित संसाधनों के सहारे व्यवस्था चल रही है, जिससे बच्चों के पोषण और उपस्थिति दोनों पर असर पड़ने की आशंका गहरा गई है।
इस संकट के चलते कई स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति घटने की आशंका है। पहले से कुपोषण झेल रहे आदिवासी क्षेत्रों में यह स्थिति और गंभीर रूप ले सकती है।
डूंगरपुर: अधिकांश स्कूलों में ठप व्यवस्था
जिले के 2243 सरकारी स्कूलों में से अधिकांश में जनवरी से मार्च तक खाद्यान्न नहीं पहुंच पाया है। करीब 9 हजार कट्टे गेहूं-चावल एफसीआई गोदामों में अटके हुए हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद वर्क ऑर्डर जारी नहीं होने से चिखली, साबला, सीमलवाड़ा और सागवाड़ा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
बांसवाड़ा: दूरस्थ स्कूलों में ज्यादा असर
बांसवाड़ा जिले में सप्लाई अनियमित बनी हुई है। खासतौर पर आदिवासी और दूरस्थ गांवों के स्कूलों में समय पर खाद्यान्न नहीं पहुंच रहा। कई जगहों पर स्कूल प्रबंधन को उधार या वैकल्पिक व्यवस्था से बच्चों को भोजन कराना पड़ रहा है।
उदयपुर: आंशिक संकट, मॉनिटरिंग पर सवाल
उदयपुर में स्थिति पूरी तरह गंभीर नहीं है, लेकिन कई ब्लॉकों में देरी से सप्लाई की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीण और ट्राइबल क्षेत्रों में मिड-डे-मील की गुणवत्ता और नियमितता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
प्रतापगढ़: छोटे स्कूलों में अधिक परेशानी
प्रतापगढ़ के छोटे और दूरस्थ स्कूलों में सीमित संसाधनों के कारण खाद्यान्न पहुंचने में देरी हो रही है, जिससे भोजन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
मुख्य कारण: सिस्टम में ढिलाई
टेंडर और वर्क ऑर्डर में देरी, एफसीआई से खाद्यान्न उठाव अधूरा रहना, कमजोर परिवहन व्यवस्था और जिला स्तर पर मॉनिटरिंग की कमी इस संकट के प्रमुख कारण हैं।
सरकार के प्रयास तेज
सरकार ने ठेकेदारों को तत्काल खाद्यान्न उठाव के निर्देश दिए हैं। नए वर्क ऑर्डर जारी करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। साथ ही एडवांस वितरण, गुणवत्ता सुधार प्रशिक्षण और मिड-डे-मील मेन्यू में मिलेट्स शामिल करने की तैयारी भी की जा रही है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के उपायुक्त सुनील पूनिया का कहना है कि कुछ जिलों में मिड डे मील के खाद्यान्न को लेकर टेंडर में देरी की शिकायत मिली थी, जल्द ही यह समस्या हल हो जाएगी।

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