यहां बेरोजगारी से बेहतर खाड़ी लौटना, महंगे किराए के बावजूद वागड़ के श्रमिकों का पलायन जारी
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सुभाष शर्मा
उदयपुर, 12 अप्रैल: वागड़ अंचल के हजारों श्रमिकों के सामने इन दिनों रोज़गार बनाम खर्च की बड़ी चुनौती खड़ी है। खाड़ी देशों में चल रहे तनाव और सीधी उड़ानों के अभाव के बावजूद श्रमिक महंगा किराया देकर वापस काम पर लौट रहे हैं। उनका कहना है कि “वहां का युद्ध यहां जीवन के युद्ध से ज्यादा भयानक नहीं है।”
क्षेत्र के करीब 15 हजार से अधिक लोग खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। इनमें से 300 से अधिक श्रमिक ईरान—इजरायल तनाव से पहले अपने घर लौटे थे, लेकिन अब दोबारा लौटने के लिए उन्हें भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। पहले जहां 15 से 20 हजार रुपए में यात्रा पूरी हो जाती थी, वहीं अब डेढ़ से दो लाख रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है।
डूंगरपुर निवासी रमेश कटारा बताते हैं, “पहले सीधी फ्लाइट से दुबई पहुंच जाते थे, अब 2-3 देशों से होकर जाना पड़ता है। टिकट इतने महंगे हो गए हैं कि उधार लेकर जाना पड़ रहा है।” बांसवाड़ा के इस्माइल खान का कहना है, “गांव में रोजगार नहीं है। परिवार की जिम्मेदारी है, इसलिए चाहे कर्ज लेना पड़े, वापस जाना ही पड़ेगा।”
एक अन्य श्रमिक हेमंत डामोर ने कहा, “हम जानते हैं कि वहां हालात सामान्य नहीं हैं, लेकिन यहां खाली बैठने से अच्छा है कि जोखिम उठाकर काम करें। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च कैसे चलेगा?”
स्थानीय लोगों का कहना है कि वागड़ क्षेत्र में रोजगार के सीमित अवसर होने के कारण युवाओं की निर्भरता खाड़ी देशों पर बढ़ती जा रही है। “अगर स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन मिलें, तो कोई भी इतना खर्च और जोखिम उठाकर विदेश नहीं जाएगा,” एक ग्रामीण ने कहा।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय हालात और उड़ानों में बदलाव के चलते यह स्थिति बनी है। इसके बावजूद श्रमिकों का जज्बा साफ है—वे हर हाल में अपने परिवार के लिए आजीविका जुटाने को तैयार हैं, भले ही इसके लिए उन्हें दस गुना अधिक कीमत क्यों न चुकानी पड़े।
