सीएम की कथनी और करनी में अंतर नहीं, प्रदेश प्रगति की राह पर : के के गुप्ता
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विकसित और समृद्धशाली राजस्थान के निर्माण में स्वच्छ भारत मिशन का महत्वपूर्ण योगदान : के के गुप्ता
प्रदेश स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर गुप्ता ने कोटपूतली बहरोड में समीक्षा बैठक ली
कोटपूतली/बहरोड़, 22 अप्रैल: प्रदेश के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राजस्थान प्रदेश निरंतर रूप से प्रगति पथ की ओर बढ़ रहा है। 2 वर्ष 4 माह के कार्यकाल में मुख्यमंत्री द्वारा अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रारंभ की गई है जिसकी बदौलत प्रदेश में युवा, किसान, महिला सहित सभी वर्ग लाभान्वित हो रहे हैं। यह उद्गार स्वच्छ भारत मिशन शहर राजस्थान सरकार के प्रदेश स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर के के गुप्ता ने जिला कोटपूतली बहरोड में आयोजित स्वच्छता कार्यशाला में व्यक्त किए।
गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संकल्प है कि हमारा राज्य समृद्ध और विकसित बने जिसके लिए स्वच्छ भारत मिशन अभियान सबसे प्राथमिक कड़ी का कार्य करता है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में 9 से 11 दिसंबर 2024 को आयोजित राइजिंग राजस्थान कार्यक्रम जिसमें लगभग 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश के एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें से 8 हजार करोड़ के एमओयू पर काम भी प्रारंभ हो गया है यह राजस्थान के लिए बहुत बड़ा गौरव का विषय है जिसका सारा श्रेय राजस्थान के मुख्यमंत्री को जाता है इससे राजस्थान समृद्ध और विकसित राजस्थान बनेगा तथा हम सबको मिलकर मुख्यमंत्री संकल्प को स्वच्छ राजस्थान बनाकर बताना होगा।
गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं रहता है। उन्होंने जिस किसी कार्य का दृढ़ संकल्प लिया हो उसे आवश्यक रूप से पूरा करते हैं क्योंकि हमारी सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है कि जीरो टॉलरेंस के साथ में कार्य करते हुए जनता के प्रति जवाबदेही को मजबूत किया जाएगा और पूरी पारदर्शिता के साथ स्वच्छ भारत मिशन को मुख्यधारा में जोड़ने के लक्ष्य के साथ सुशासन के संकल्प को पूर्ण किया जा रहा है।
गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2014 से पूर्व पूरे देश में गंदगी और कचरे का साम्राज्य फैला हुआ था। देश के प्रधानमंत्री ने एक बड़े विजन के साथ में स्वच्छ भारत मिशन अभियान प्रारंभ किया। उनकी बड़ी सोच रही है कि देश का प्रत्येक गांव, ढाणी और कस्बा शहर स्वच्छ और सुंदर होना चाहिए। देखते ही देखते सोचता अभियान एक जन आंदोलन बन गया क्योंकि स्वच्छ भारत मिशन से देश के 142 करोड़ लोगों का सीधा संबंध है। इस अभियान से पहले तक देश में प्रतिवर्ष करीब 25 लाख लोग असमय काल का ग्रास बन रहे थे लेकिन जब से स्वच्छ भारत मिशन शहर और ग्रामीण संचालित हो रहा है और गंदगी तथा कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है तो वातावरण भी स्वच्छ हो रहा है। पहले लोग गंदगी से होने वाली प्रमुख बीमारी डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, उल्टी, दस्त बुखार आदि से पीड़ित हो रहे थे, लेकिन अब बीमारियां भी काम हो रही है। सरकारों को जनता के लिए स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाएं चलानी पड़ती है जिसमें प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रूपया व्यय हो रहा है। अब स्वच्छ भारत मिशन की बदौलत आम जनता का स्वास्थ्य भी अच्छा हो रहा है वही बीमा योजना का सरकारी धन बचत होकर देश और प्रदेश के विकास में काम आ रहा है।
सभी निकायों की स्वच्छता कार्यों के आधार पर होगी रैंकिंग
उन्होंने कहा कि सभी निकायों को स्वच्छता पर चल रहे कार्यो के आधार पर चार भागों में बाँटा गया है। ए श्रेणी के निकायों में अभी स्वच्छता के प्रति श्रेष्ठ कार्य चल रहा है। बी श्रेणी के निकायों में स्वच्छता के प्रति संतोषजनक कार्य किये जा रहे है। सी श्रेणी के निकायों में स्वच्छता के कार्यो के प्रति गंभीरता नहीं है सुधार के लिए चेतावनी दी जानी आवश्यक है। डी श्रेणी के निकायों में सख़्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
स्वच्छता में लक्ष्य प्राप्ति हेतु इन पांच प्रमुख बिंदुओं पर करें विशेष फोकस
घर-घर कचरा संग्रहण
सुबह 10 बजे से पूर्व शत-प्रतिशत घर-घर कचरा संग्रहण हो। स्रोत पर ही गीला और सूखा कचरा अलग किया जाए। जन जागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाएं। कचरा संग्रहण की सूक्ष्म मॉनिटरिंग हो ताकि कोई लूपहोल नहीं रहे।
नाइट स्वीपिंग : रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक प्रत्येक 400 मीटर क्षेत्र में एक कर्मचारी सफाई करे। वाणिज्यिक क्षेत्रों में 365 दिन रात्रिकालीन सफाई होनी चाहिए। रात की पारी में सफाई करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
सार्वजनिक शौचालय : सार्वजनिक शौचालय दिन में तीन बार साफ हों। अधिकारी और स्वास्थ्य निरीक्षण स्वयं दिन में एक बार सार्वजनिक शौचालय का उपयोग करें। इससे शौचालयों में स्वच्छता बढ़ेगी जिससे आमजन की सराहना भी मिलेगी। विद्यालयों के शौचालयों की भी नियमित सफाई करवाएं।
प्लास्टिक थैली : प्लास्टिक थैली हमारे पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और पशुओं के लिए हानिकारक है। प्लास्टिक थैली के उपयोग को इस हद तक हतोत्साहित करना होगा कि प्लास्टिक हमें नजर ही नहीं आए। प्लास्टिक थैली का उत्पादन और व्यापार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए।
खाली प्लॉट्स : शहर में खाली प्लाट्स कचरे का बड़ा केंद्र बन गए हैं। ऐसे सभी खाली प्लाट्स के मालिकों को गंदगी साफ करवाने के बाद बाउंड्री करवाने के लिए पाबंद करें। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो निगम यह काम करवाए और लागत का 10 गुना प्लॉट मालिक से वसूले। राशि जमा नहीं करवाने पर प्लॉट को सीज किया जाए।
इन बिंदुओं पर भी दें ध्यान
शहर में शत प्रतिशत स्ट्रीट लाइट जलनी चाहिए। बाग-बगीचे की नियमित सफाई हो। वहां झूले लगे हों तथा फव्वारे कार्यशील हों। निर्माण सामग्री सड़को और नालियों को बाधित नहीं करे। बिना लाइसेंस के मांस की दुकानों को बंद करवाया जाए। डिवाइडर कचरा पात्र नहीं बनें। सरकारी संपत्तियों पर पोस्टर नहीं चिपके हों। कचरा यार्ड में आग नहीं लगनी चाहिए। 90 ए भू रूपांतरित करने के पूर्व भू मालिक द्वारा जमीन का विकास कार्य कराए जाने के स्पष्ट निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर ओमप्रकाश सहारण, नगर परिषद आयुक्त कोटपूतली अरुण शर्मा, बहरोड़ नूर मोहम्मद सहित जिले की नगरीय निकायों के अधिशासी अधिकारी मौजूद रहे।
