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उदयपुर की सड़कों से गायब होती छांव, डिवाइडरों में अब सिर्फ सजावटी पौधे

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उदयपुर की सड़कों से गायब होती छांव, डिवाइडरों में अब सिर्फ सजावटी पौधे

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बोगनबेलिया और चम्पा ने ली बड़े पेड़ों की जगह, पर्यावरण प्रेमियों ने जताई चिंता
उदयपुर, 16 मई:
शहर में सड़कों के सौंदर्यीकरण के नाम पर लगाए जा रहे नए डिवाइडरों ने हरियाली और पक्षियों के आशियानों पर बड़ा असर डालना शुरू कर दिया है। शहर में बनाए जा रहे नए डिवाइडरों में पहले जहां बड़े छायादार पेड़ हुआ करते थे, अब उनकी जगह बोगनबेलिया और चम्पा जैसे छोटे सजावटी पौधे लगा दिए गए हैं। ये पौधे देखने में आकर्षक जरूर हैं, लेकिन न तो छाया देते हैं और न ही पक्षियों के लिए बसेरा बन पाते हैं। भुवाणा से लेकर अहमदाबाद रोड इसका उदाहरण है, जहां डिवाइडर के बीच केवल बोगनबेलिया और चम्पा के पौधे ही लगाए गए हैं।
शहर के पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले सड़क किनारे नीम, अशोक और अन्य बड़े पेड़ों पर पक्षियों के घोंसले और रैन बसेरे हुआ करते थे। अब छोटे पौधों के कारण पक्षियों का प्राकृतिक ठिकाना खत्म होता जा रहा है। इसके साथ ही सड़कों पर यात्रियों और राहगीरों को मिलने वाली प्राकृतिक छाया भी लगभग समाप्त हो चुकी है।
स्थिति यह है कि नए डिवाइडरों के बीच के हिस्से को पूरी तरह कांक्रीट से पक्का कर दिया गया है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति भविष्य में बड़ा होने वाला पौधा भी लगा दे तो उसकी जड़ें विकसित नहीं हो पाएंगी। पर्यावरणविदों का कहना है कि यह व्यवस्था लंबे समय में शहर के तापमान को बढ़ाने और हरियाली कम करने का कारण बन सकती है।
हालांकि आरके चौराहे से शोभागपुरा तक पुराने नीम के पेड़ों को अब तक बचाकर रखा गया है, लेकिन जहां भी नए डिवाइडर बन रहे हैं वहां छायादार पेड़ों की योजना नजर नहीं आ रही।
पर्यावरण प्रेमी महेश पालीवाल ने कहा, “सजावटी पौधे शहर को सुंदर जरूर दिखाते हैं, लेकिन वे पर्यावरण संतुलन और पक्षियों के संरक्षण का विकल्प नहीं हो सकते।” वहीं स्थानीय निवासी राहुल शर्मा ने कहा, “गर्मी में सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। पहले पेड़ों की वजह से राहत मिलती थी, अब सिर्फ कांक्रीट और धूप बची है।” शहरवासियों ने नगर निगम और यूआईटी से मांग की है कि नए डिवाइडरों में भी ऐसे पौधे लगाए जाएं जो आने वाले वर्षों में बड़े और छायादार पेड़ बन सकें।

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