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संग्रहालय केवल धरोहर संरक्षण स्थल नहीं, समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम- डाॅ. नीलांजन

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संग्रहालय केवल धरोहर संरक्षण स्थल नहीं, समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम- डाॅ. नीलांजन

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अन्तर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर संगोष्ठी आयोजित
उदयपुर, 23 मई:
अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस -2026 के उपलक्ष्य में भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (इनटैक), उदयपुर चैप्टर एवं मानव विज्ञान सर्वेक्षण भारत सरकार, पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में “विभाजित दुनिया को जोड़ते संग्रहालय” विषयक विशेष संगोष्ठी एवं विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन जोनल एंथ्रोपोलॉजिकल म्यूजियम, प्रतापनगर में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में संग्रहालयों की समकालीन प्रासंगिकता, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से संग्रहालयों के बदलते स्वरूप पर विस्तृत चर्चा हुई। संगोष्ठी में लगभग 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें इनटैक सदस्य, शोधार्थी, शिक्षाविद्, विद्यालयों के प्राचार्य एवं शिक्षक, संग्रहालय विशेषज्ञ तथा कला एवं संस्कृति प्रेमी शामिल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की वृत्तचित्र फिल्म के प्रदर्शन से हुआ। इस अवसर पर मानव विज्ञान सर्वेक्षण के कार्यालय प्रमुख एवं उप निदेशक (संस्कृति) डॉ. नीलांजन खातुआ ने कहा कि संग्रहालय केवल अतीत की धरोहरों के संरक्षण स्थल नहीं हैं, बल्कि समाज, संस्कृति और समुदायों के मध्य जीवंत संवाद स्थापित करने वाले सशक्त माध्यम भी हैं।
इनटैक उदयपुर चैप्टर के संयोजक गौरव सिघवी ने “प्रदर्शन से परे: संग्रहालय की वास्तविक पहचान क्या है?” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि आधुनिक संग्रहालय अब मात्र वस्तुओं के प्रदर्शन स्थल नहीं रहे, बल्कि वे सांस्कृतिक स्मृतियों, संवेदनाओं और सामाजिक चेतना के जीवंत केंद्र बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संग्रहालयों के माध्यम से लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, इतिहास और लोक परंपराओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से संग्रहालय संस्कृति से परिचित कराने पर उनमें सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी विकसित की जा सकती है। साथ ही युवाओं को संग्रहालयों से जोड़ने के लिए डिजिटल तकनीक, इंटरैक्टिव डिस्प्ले, स्टोरीटेलिंग और सहभागी गतिविधियों जैसे नवाचारों को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में डिजिटल कलाकार डॉ. गौरव शर्मा ने “डिजिटल कला का इतिहास और कलाकार की योग्यता” विषय पर व्याख्यान देते हुए डिजिटल माध्यमों से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और प्रस्तुतीकरण की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
अंत में संग्रहालय की सहायक कीपर सुश्री सुदीपा मंडल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को संग्रहालय दीर्घा का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक एवं मानवशास्त्रीय प्रदर्शनों का अवलोकन किया।

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