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दो साल में ₹36.58 करोड़ की लूट, 232 केसों ने खोली अंतरराष्ट्रीय गैंग की परतें

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दो साल में ₹36.58 करोड़ की लूट, 232 केसों ने खोली अंतरराष्ट्रीय गैंग की परतें

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कंबोडिया से साइबर हमला: डिजिटल अरेस्ट, फर्जी सिम और म्यूल खातों के जरिए चल रहा करोड़ों का खेल, उदयपुर के दो बुजुर्गों से ही उड़ाए ₹1.38 करोड़
उदयपुर, 6 जून:
मेवाड़-वागड़ क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों के निशाने पर है। उदयपुर रेंज में पिछले दो वर्षों के दौरान साइबर ठगों ने 232 वारदातों को अंजाम देकर लोगों से ₹36 करोड़ 58 लाख 7 हजार 501 की ठगी कर ली। पुलिस जांच में सामने आया है कि इन वारदातों के तार कंबोडिया में बैठे संगठित साइबर सिंडिकेट से जुड़े हैं, जो फर्जी सिम, किराये के बैंक खातों और विदेशी सर्वरों के जरिए भारत में करोड़ों रुपए की साइबर लूट को अंजाम दे रहे हैं।
रिकवरी सिर्फ 10 फीसदी, बाकी रकम विदेशों में गायब
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 100 और वर्ष 2026 में अब तक 132 गंभीर साइबर ठगी के मामले दर्ज हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि ₹36.58 करोड़ की ठगी के मुकाबले अब तक केवल ₹3.60 करोड़ के करीब राशि ही रिकवर हो सकी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रकम कुछ ही मिनटों में कई खातों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेशों में पहुंचा दी जाती है, जिससे ट्रैकिंग बेहद जटिल हो जाती है।
डिजिटल अरेस्ट से बुजुर्ग बने आसान शिकार
जनवरी में सामने आए दो मामलों ने पुलिस को भी चौंका दिया। सुखेर निवासी 68 वर्षीय भरत व्यास से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर ₹67.90 लाख और फतहपुरा निवासी 65 वर्षीय शशि जैन से ₹71 लाख ठग लिए गए। दोनों मामलों की तकनीकी जांच में आरोपियों के आईपी एड्रेस कंबोडिया से जुड़े मिले, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पुष्टि हुई।
गरीबों और छात्रों के खाते बन रहे साइबर अपराध का हथियार
जांच में सामने आया है कि साइबर गैंग ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों, मजदूरों और छात्रों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं। इन ‘म्यूल खातों’ में ठगी की रकम जमा कर तुरंत अन्य खातों और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर कर दी जाती है। इससे स्थानीय खाताधारक पुलिस के शिकंजे में आते हैं, जबकि असली मास्टरमाइंड विदेश में बैठे रहते हैं।
आईजी की चेतावनी
उदयपुर रेंज के आईजी गौरव श्रीवास्तव ने कहा कि कोई भी पुलिस, सीबीआई, ईडी या न्यायिक एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी नहीं करती। ऐसे कॉल आते ही उन्हें काटें और तत्काल 1930 हेल्पलाइन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का मानना है कि समय रहते शिकायत मिलने पर ठगी की राशि बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

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