लाल किला मैदान से गूंजा जनजातीय अस्मिता और अधिकारों का स्वर
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जनजाति समागम-2026 में संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का राष्ट्रीय आह्वान
उदयपुर/नई दिल्ली, 8 जून: भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित जनजाति समागम-2026 जनजातीय संस्कृति, परंपरा और अस्मिता के विराट राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा। देशभर के 500 से अधिक जनजातीय समुदायों से आए लाखों महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ समागम में शामिल हुए।
राजघाट, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट, कुदसिया बाग और अन्य स्थानों से निकली भव्य शोभायात्राओं ने दिल्ली को जनजातीय रंगों से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने जनजातीय समाज को भारत की सांस्कृतिक आत्मा बताते हुए कहा कि यह आयोजन आने वाले समय में जनजातीय समाज के “महाकुंभ” के रूप में याद किया जाएगा।
समागम में वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा में जनजातीय समाज की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवन की उनकी परंपरा आज भी विश्व के लिए प्रेरणा है।
जनजाति सुरक्षा मंच ने जनजातीय पहचान, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। मंच ने अनुसूचित जनजाति की स्पष्ट वैधानिक परिभाषा, जनजातीय सांस्कृतिक अस्मिता की सुरक्षा और लंबे समय से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय की आवश्यकता जताई।
प्रदेश संयोजक लालुराम कटारा ने बताया कि राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सलूंबर, झाड़ोल, कोटड़ा, खेरवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, सिरोही सहित अनेक जिलों से बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने भाग लिया। समागम का समापन जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपरागत आस्था और सामाजिक न्याय की रक्षा के राष्ट्रीय संकल्प के साथ हुआ।
राजस्थान से हजारों कार्यकर्ताओं की भागीदारी
जनजाति समागम-2026 में राजस्थान के वागड़, मेवाड़, हाड़ौती और मारवाड़ क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचे। जनजाति सुरक्षा मंच के अनुसार बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सलूंबर, झाड़ोल, कोटड़ा, गोगुंदा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, कोटा, झालावाड़, बाड़मेर, जालौर, जोधपुर और जैसलमेर सहित कई जिलों से कार्यकर्ताओं ने ट्रेन और बसों के माध्यम से समागम में भाग लिया। मंच ने जनजातीय समाज से संस्कृति, परंपरा और अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान भी किया।
