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“मैं तो जेल में मर ही गया था…” : विक्रम भट्ट

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“मैं तो जेल में मर ही गया था…” : विक्रम भट्ट

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आपबीती : उदयपुर जेल में 72 दिन की दिनचर्या आई सामने, बोले- कैदी डरावनी कहानियां सुनाने की फरमाइश करते थे
उदयपुर, 8 जून:
फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट ने उदयपुर जेल में बिताए 2 महीने 11 दिन के अनुभव को याद करते हुए कहा कि वह दौर उनकी जिंदगी का सबसे कठिन समय था। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि जेल में रहते हुए उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और पीलिया होने के बाद स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्हें लगा जैसे वह “मर ही गए थे”।
भट्ट ने बताया कि वह एक बैरक में 60 से 80 कैदियों के साथ रहते थे। हालांकि हालात मुश्किल थे, लेकिन साथी कैदियों ने उनका पूरा ख्याल रखा। वे उनके लिए खाना लाते, कपड़ों की देखभाल करते और बीमारी के दौरान अपने कंबल तक ओढ़ा देते थे। कैदी उन्हें मजाक में “भीष्म पितामह” कहकर बुलाते थे और रात में उनसे डरावनी कहानियां सुनाने की फरमाइश करते थे।
बीमारी ने बढ़ाई मुश्किलें
विक्रम भट्ट ने बताया कि वह पहले से एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित हैं। कड़ाके की सर्दी में जोड़ों और हड्डियों के दर्द के बीच उन्हें पीलिया भी हो गया। उनका दावा है कि तेज बुखार और कमजोरी के बावजूद अस्पताल ले जाने में देरी हुई।
रिहाई के बाद आए सितारों के फोन
भट्ट ने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद मिथुन चक्रवर्ती, संजय दत्त और अजय देवगन ने फोन कर उनका हालचाल पूछा। उन्होंने कहा कि संजय दत्त का फोन उनके लिए खास था क्योंकि दोनों ने कभी साथ काम नहीं किया था। गौरतलब है कि उदयपुर के व्यवसायी डॉ. अजय मुर्डिया द्वारा दर्ज 30 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी के मामले में विक्रम भट्ट को 7 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई थी।

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