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पूर्व संध्या पर प्रताप की अश्वारूढ़ प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन

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पूर्व संध्या पर प्रताप की अश्वारूढ़ प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन

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प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती
उदयपुर 16 जून
: प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की 486वीं जयंति की पूर्व संध्या पर मंगलवार को जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ के प्रतापनगर स्थित महाराणा प्रताप खेल मैदान पर लगी प्रताप की अश्वारूढ़ प्रतिमा पर कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत, कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर, पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा, रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, के सानिध्य में तीनों परिसरों के कार्यकर्ताओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हे नमन किया।
हल्दी घाटी का युद्ध स्वतंत्रता बनाम साम्राज्यवाद – प्रो. सारंगदेवोत
इस अवसर पर कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि इतिहास में सबसे पहला नाम महाराणा प्रताप का आता है प्रताप ने जिस तरह से स्वाधीनता का बिगुल बजाया था , उनका एक ही ध्येय था कि हमारी स्वाधीनता अक्षुण रहनी चाहिए। हल्दीघाटी का युद्ध स्वतंत्रता बनाम साम्राज्यवाद का था। हर वर्ग ने प्रताप का साथ दिया। मेवाड़ में महाराणा प्रताप ने वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा व सर्व धर्म समभाव, विश्व शांति का जो पाठ पढ़ाया था, उसे वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना है, ताकि अपराध मुक्त समाज का निर्माण किया जा सके। स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रताप ने अपना पूरा राजपाट छोड दिया था। महाराणा प्रताप को देश व व्यक्ति के आत्म सम्मान एवं देश प्रेम, स्वतंत्रता एवं वीरता के लिए जाना जाता है। प्रताप का व्यक्तित्व एवं कृतित्व हमारे लिए सदा प्रेरणास्पद रहा है। देश के युवाओं को इनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।
अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि प्रताप ने कभी अधीनता स्वीकार नहीं की। धर्म की रक्षा के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे। प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप ने मानवाधिकारों के लिए संधर्ष का मुगलों के जमाने में सूत्रपात किया था। इस लडाई में उन्होंने स्वतंत्रता के लिए समानता का रास्ता अपनाया, उनकी फौज में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व रहा।
इस मौके पर प्रो. मलय पानेरी, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. जीवनसिंह खरकवाल, प्रो. मंजू मांडोत, परीक्षा नियंत्रक प्रो. पारस जैन, प्रो. युवराज सिंह राठौड, डॉ. धमेन्द्र राजौरा, प्रो.. अवनीश नागर, प्रो.. हेमेन्द्र चौधरी, डॉ. लीली जैन, प्रो. अमी राठौड़, प्रो. सुनिता मुर्डिया, प्रो. रचना राठौड़, प्रो. बीएल श्रीमाली, प्रो. सुनील चौधरी, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. गुणबाला आमेटा, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, निजी सचिव केके कुमावत, जितेन्द्र सिंह चौहान, उमराव सिंह राणावत, डॉ. ओम पारीक, डॉ. जयसिंह जोधा, डॉ. धीरेन्द्र सिसोदिया, डॉ. मोहसीन छीपा, भगवती लाल श्रीमाली सहित विद्यापीठ के डीन डायरेक्टर एवं कार्यकर्ताओं ने प्रताप को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

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