उदयपुर में बनेगा भारत का पहला ‘आर्किटेक्ट्स टॉवर’
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सभ्यता के शिल्पियों को पहली सार्वजनिक श्रद्धांजलि: विश्वविख्यात वास्तुविद मंडन की स्मृति में 35 फीट ऊंचा स्मारक, विज्ञान, संस्कृति और वास्तुकला का बनेगा अनूठा संगम
उदयपुर, 6 जुलाई: झीलों की नगरी उदयपुर जल्द ही देश को एक ऐसी अनूठी सौगात देने जा रही है, जो भारतीय वास्तुकला और शिल्प परंपरा को नया सम्मान दिलाएगी। शोभागपुरा स्थित जे.के. सर्किल पर विश्वविख्यात वास्तुविद मंडन की स्मृति में भारत का पहला सार्वजनिक ‘आर्किटेक्ट्स टॉवर’ बनाया जा रहा है। करीब 35 फीट ऊंचा यह स्मारक केवल एक वास्तु संरचना नहीं, बल्कि उन शिल्पियों और आर्किटेक्ट्स के प्रति समाज की सामूहिक कृतज्ञता का प्रतीक होगा, जिन्होंने सभ्यताओं, नगरों, दुर्गों और मंदिरों को आकार दिया।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर एवं आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा ने बताया कि 7 जुलाई से निर्माण कार्य का शुभारंभ होगा। उनका कहना है कि दुनिया में राजाओं और योद्धाओं के स्मारक तो अनेक हैं, लेकिन उन रचनाकारों को सार्वजनिक सम्मान नहीं मिला, जिन्होंने इन स्मारकों की कल्पना और निर्माण किया। इसी सोच से ‘आर्किटेक्ट्स टॉवर’ की परिकल्पना की गई है।
यह स्मारक मेवाड़ के महान सूत्रधार मंडन को समर्पित होगा, जिन्होंने 15वीं शताब्दी में महाराणा कुंभा के प्रधान वास्तुविद के रूप में कुंभलगढ़ दुर्ग, कटारगढ़ और चित्तौड़गढ़ के कई स्थापत्य कार्यों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने प्रासादमंडन, राजवल्लभ, रूपमंडन और वास्तुमंडन जैसे कालजयी ग्रंथों की रचना कर भारतीय वास्तुशास्त्र को व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया।
सूर्य की रोशनी से समय बताएगी घड़ी

टॉवर की विशेषता इसमें स्थापित होने वाला वर्टिकल सन डायल (ऊर्ध्वाधर सूर्य घड़ी) होगी। तकनीकी सहयोगी आर्किटेक्ट प्रियंका कोठारी के अनुसार यह संरचना भारतीय ज्ञान परंपरा, समय विज्ञान और आधुनिक वास्तुकला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगी। दिन में इसकी विशिष्ट डिजाइन और रात में आकर्षक रोशनी इसे पर्यटकों, आर्किटेक्ट्स, इंजीनियरों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए नया आकर्षण बनाएगी। उदयपुर का यह प्रयास केवल शहर की सुंदरता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह संदेश देगा कि सभ्यताओं को अमर बनाने में शासकों के साथ-साथ सृजनशील शिल्पियों और आर्किटेक्ट्स की भी समान भूमिका होती है।
कौन थे महान सूत्रधार मंडन?
15वीं शताब्दी के भारत के प्रसिद्ध वास्तुविद एवं शिल्पाचार्य।
महाराणा कुंभा के प्रधान आर्किटेक्ट और सूत्रधार रहे।
कुंभलगढ़ दुर्ग, कटारगढ़ और चित्तौड़गढ़ के कई स्थापत्य कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान।
प्रासादमंडन, राजवल्लभ, रूपमंडन और वास्तुमंडन जैसे वास्तुशास्त्रीय ग्रंथों के रचयिता।
भारतीय वास्तुकला और नगर नियोजन के सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप देने वाले महान आचार्य, जिनके ग्रंथ आज भी देश-विदेश में अध्ययन का महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं।
