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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में संक्रमण रोकथाम के लिए सख्त गाइडलाइन जारी

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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में संक्रमण रोकथाम के लिए सख्त गाइडलाइन जारी

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लेबर रूम और मातृत्व ओटी में झाड़ू पर रोक, केवल वेट मॉपिंग होगी; रिकॉर्ड रखने और जवाबदेही तय
उदयपुर, 12 जुलाई:
राज्य सरकार के चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 8 जुलाई को सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों के लिए प्रसव कक्ष (लेबर रूम) और मातृत्व ऑपरेशन थियेटर (मेटरनिटी ओटी) में संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण (आईपीसी) संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को संक्रमण मुक्त, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना तथा अस्पताल जनित संक्रमण (एचएआई) की दर को न्यूनतम कर मातृ एवं नवजात मृत्यु एवं रुग्णता में कमी लाना है।
परिपत्र के अनुसार लेबर रूम और ओटी की सफाई हमेशा “स्वच्छ से अस्वच्छ” तथा “ऊपर से नीचे” के सिद्धांत पर की जाएगी। फर्श की सफाई दरवाजे से सबसे दूर वाले हिस्से से शुरू होकर दरवाजे की ओर की जाएगी। इन क्षेत्रों में झाड़ू का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और केवल गीली पोंछा (वेट मॉपिंग) पद्धति अपनानी होगी।
संक्रमण रोकने के लिए फर्श, सतहों और उपकरणों की सफाई हेतु अलग-अलग रंग-कोडित मॉप का उपयोग अनिवार्य किया गया है। साथ ही थ्री-बकेट मॉपिंग सिस्टम अपनाना होगा, जिसमें पहली बाल्टी में डिटर्जेंट, दूसरी में साफ पानी और तीसरी में 0.5 प्रतिशत सोडियम हाइपोक्लोराइड घोल रखा जाएगा।
विशेष सावधानियां भी तय
सफाई कार्य के दौरान कर्मचारियों को पीपीई किट, यूटिलिटी ग्लव्स, मास्क, कैप, गाउन और एप्रन पहनना अनिवार्य होगा। फर्श पर गिरी सुई या अन्य नुकीली वस्तुओं को हाथ से उठाने पर रोक लगाई गई है और इसके लिए फोरसेप्स का उपयोग करना होगा। परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दो अलग-अलग विसंक्रामकों या साबुन को आपस में मिलाकर उपयोग नहीं किया जाएगा।
ऑपरेशन थियेटर में फॉगिंग के लिए निर्धारित मात्रा में बैक्सीशील्ड का उपयोग किया जाएगा और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ओटी को कम से कम एक घंटे तक बंद रखना अनिवार्य होगा।
रिकॉर्ड और जवाबदेही तय
विभाग ने प्रत्येक चिकित्सा संस्थान में सफाई, विसंक्रमण और फॉगिंग का दैनिक, साप्ताहिक और मासिक रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य किया है। चिकित्सा अधिकारी प्रभारी को संसाधनों की उपलब्धता और रिकॉर्ड सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि स्टाफ नर्स एवं एएनएम दैनिक निगरानी और साफ-सफाई सुनिश्चित करेंगी। वहीं, संक्रमण नियंत्रण नोडल अधिकारी को ऑडिट, प्रशिक्षण और सैंपलिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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