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नवलखा महल राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का प्रेरक केंद्र : डॉ. बैरवा

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नवलखा महल राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का प्रेरक केंद्र : डॉ. बैरवा

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उपमुख्यमंत्री ने विभिन्न प्रकल्पों का किया अवलोकन, महर्षि दयानंद की विरासत को बताया राष्ट्रीय धरोहर
उदयपुर, 16 जुलाई:
राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने गुरुवार को गुलाब बाग स्थित नवलखा महल सांस्कृतिक केंद्र का भ्रमण कर इसे राष्ट्रभक्ति, संस्कृति और प्रेरणा का अनूठा केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि यहां विकसित किए गए विभिन्न प्रकल्प केवल सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने वाले जीवंत अभियान हैं। विशेष रूप से राष्ट्र मंदिर में स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम क्रांतिकारियों की सिलिकॉन प्रतिमाएं और उनके जीवन संघर्ष का सजीव प्रस्तुतीकरण नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
डॉ. बैरवा ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपनी कालजयी कृति ‘सत्यार्थ प्रकाश’ की रचना इसी ऐतिहासिक स्थल पर की थी, जिससे नवलखा महल का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने आमजन से इस धरोहर का अवलोकन करने का आह्वान करते हुए कहा कि यहां की प्रदर्शनी राष्ट्रप्रेम और सामाजिक चेतना का संदेश देती है।
इस अवसर पर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज सुधार के साथ देश की स्वतंत्रता चेतना को भी नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि मानगढ़ आंदोलन के जननायक गोविंद गुरु भी महर्षि दयानंद के शिष्य रहे थे। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रमोद सामर ने नवलखा महल को आध्यात्मिक शांति और सांस्कृतिक प्रेरणा का केंद्र बताया।
न्यास अध्यक्ष अशोक आर्य ने बताया कि कभी मेवाड़ शासन के अतिथि गृह रहे नवलखा महल में महर्षि दयानंद ने साढ़े छह माह प्रवास किया था। वर्ष 1992 में आर्य समाज को 99 वर्ष की लीज पर मिलने के बाद दानदाताओं के सहयोग से इसका कायाकल्प किया गया। आज यह स्थल राजस्थान सरकार की पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल होने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।

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