हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: गाड़िया लुहारों के 184 भूखंडों के अवैध हस्तांतरण रद्द
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महापौर के परिजनों समेत अन्य लाभार्थियों की निष्पक्ष जांच के आदेश, छह माह में रिपोर्ट तलब
जोधपुर/भीलवाड़ा, 17 जुलाई: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने भीलवाड़ा की कीर खेड़ा स्थित गाड़िया लुहार आवासीय योजना में कथित भूखंड घोटाले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए गाड़िया लुहार समुदाय के लिए आरक्षित 184 भूखंडों के गैर-समुदाय के लोगों के पक्ष में किए गए सभी विक्रय, उपहार, रजिस्ट्री और अन्य हस्तांतरणों को शून्य घोषित कर निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने माना कि प्रशासन शहरों के संग अभियान के दौरान 21 अप्रैल 2022 के प्रशासनिक आदेश की गलत व्याख्या कर अहस्तांतरणीय भूखंडों का गैर-पात्र व्यक्तियों के नाम हस्तांतरण किया गया, जो योजना की मूल भावना और कानून के विपरीत है।
याचिकाकर्ता पार्षद राजेश सिंह सिसोदिया एवं पंकज गर्ग की ओर से अधिवक्ता गौरव श्रीमाली ने अदालत को बताया कि इस प्रक्रिया का लाभ उठाकर तत्कालीन नगर परिषद चेयरमैन एवं वर्तमान महापौर राकेश पाठक के परिजनों सहित कई प्रभावशाली लोगों ने गरीब गाड़िया लुहार परिवारों से कम कीमत पर भूखंड खरीदकर अपने नाम नामांतरण करा लिए।
न्यायालय ने आरोपों को गंभीर मानते हुए स्वायत्त शासन विभाग एवं क्षेत्रीय उपनिदेशक को महापौर के परिजनों तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय फैक्ट-फाइंडिंग जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच रिपोर्ट छह माह के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि गाड़िया लुहार समुदाय के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति के पक्ष में किए गए हस्तांतरण मान्य नहीं होंगे। संबंधित भूखंड मूल आवंटियों अथवा नियमानुसार राज्य सरकार या स्थानीय निकाय में निहित होंगे तथा ऐसे अवैध हस्तांतरणों के आधार पर किए गए नामांतरण और राजस्व प्रविष्टियां भी अमान्य रहेंगी। यदि किसी खरीदार ने धनराशि का भुगतान किया है तो वह कानून के अनुसार उसकी वसूली का स्वतंत्र दावा कर सकता है। न्यायालय ने आदेशों की 30 दिनों के भीतर अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
फैसले की प्रमुख बातें
184 आरक्षित भूखंडों के सभी अवैध हस्तांतरण निरस्त।
महापौर के परिजनों सहित संबंधित व्यक्तियों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश।
6 माह में जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करनी होगी।
30 दिनों में आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश।
कोर्ट ने कहा कि कमजोर वर्गों के लिए बनी योजनाओं का निजी लाभ या भूमि कारोबार के लिए दुरुपयोग संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है।
