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आदिवासी तीर्थ मानगढ़ धाम में भील प्रदेश की मांग गूंजी, चार राज्यों से जुटे हजारों आदिवासी

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आदिवासी तीर्थ मानगढ़ धाम में भील प्रदेश की मांग गूंजी, चार राज्यों से जुटे हजारों आदिवासी

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40-50 हजार लोगों की मौजूदगी में अलग राज्य की मांग दोहराई, आदिवासी अधिकारों और विकास के मुद्दे उठे
बांसवाड़ा, 17 जुलाई:
बांसवाड़ा जिले के ऐतिहासिक मानगढ़ धाम में गुरुवार को आयोजित ‘भील प्रदेश संदेश यात्रा’ महासम्मेलन में अलग ‘भील प्रदेश’ की मांग एक बार फिर जोरदार तरीके से उठी। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के तत्वावधान में सामाजिक एवं गैर-राजनीतिक बैनर तले आयोजित इस महासम्मेलन में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पहुंचे। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में करीब 40 से 50 हजार लोगों ने भाग लिया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि आजादी के कई दशक बाद भी आदिवासी बहुल क्षेत्रों का अपेक्षित विकास नहीं हो सका है। चार राज्यों में बंटे होने के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों के आदिवासी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सुविधाओं से वंचित हैं। इसलिए आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिलाकर अलग भील प्रदेश का गठन समय की आवश्यकता है।
भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के जिला उपाध्यक्ष विनोद कुमार खराड़ी ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों और अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारों की उपेक्षा के कारण आदिवासी क्षेत्रों का समुचित विकास नहीं हो पाया।
स्विट्जरलैंड दौरे पर होने के कारण बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने फोन संदेश के माध्यम से कहा कि चार राज्यों की सरकारों ने लंबे समय तक आदिवासी क्षेत्रों की अनदेखी की है, जिससे यह इलाका विकास की दौड़ में पिछड़ गया है। उन्होंने भील प्रदेश की मांग को जनभावना से जुड़ा मुद्दा बताया।
महासम्मेलन में बीएपी विधायक कमलेश डोडियार, थावरचंद मीणा, उमेश मीणा, अनिल कटारा और जयकृष्ण पटेल सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। वक्ताओं ने आदिवासी युवाओं को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिलने और समाज पर बढ़ते उत्पीड़न के मामलों पर भी चिंता जताई।

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