LOADING

Type to search

उदयपुर के प्रेरणादायी गुरु : शिक्षा को सेवा, संस्कार और समाज परिवर्तन का बनाया माध्यम

education

उदयपुर के प्रेरणादायी गुरु : शिक्षा को सेवा, संस्कार और समाज परिवर्तन का बनाया माध्यम

Share

उदयपुर, 28 जुलाई: गुरु केवल कक्षा में पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं, बल्कि समाज की दिशा तय करने वाला व्यक्तित्व होता है। उदयपुर की धरती ने ऐसे अनेक शिक्षाविद दिए हैं, जिन्होंने शिक्षा को रोजगार नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का मिशन बनाया। उनके प्रयासों से मेवाड़ में आधुनिक, मूल्यपरक और जनहितैषी शिक्षा की मजबूत नींव पड़ी।

डॉ. मोहन सिंह मेहता : आधुनिक शिक्षा के प्रणेता

डॉ. मोहन सिंह मेहता ने वर्ष 1931 में उदयपुर में विद्याभवन संस्थान की स्थापना कर मेवाड़ में आधुनिक और मूल्यपरक शिक्षा की नींव रखी। उनका मानना था कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि अच्छे नागरिक और जिम्मेदार समाज के निर्माण का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों में व्यक्तित्व विकास, लोकतांत्रिक सोच, श्रम की गरिमा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को बढ़ावा दिया। उनके शैक्षिक प्रयोगों ने दक्षिण राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी। आज भी विद्याभवन उनके आदर्शों और शिक्षा दर्शन का सशक्त उदाहरण माना जाता है।

डॉ. के.एल. श्रीमाली : शिक्षा सुधार के दूरदर्शी

डॉ. कालूलाल श्रीमाली देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों में गिने जाते हैं। उन्होंने विद्याभवन की शैक्षिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शिक्षक प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षा सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे भारत सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहे और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को नई सोच प्रदान की। उनका विश्वास था कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति का आधार प्रशिक्षित और संवेदनशील शिक्षक होते हैं। शिक्षा में गुणवत्ता, अनुशासन और नवाचार को बढ़ावा देने के उनके प्रयास आज भी शिक्षा जगत के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

पंडित जनार्दन राय नागर : जन-जन तक शिक्षा पहुंचाने वाले महापुरुष

पंडित जनार्दन राय नागर ने राजस्थान विद्यापीठ की स्थापना कर शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया। उन्होंने ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराए। उनका उद्देश्य था कि गरीबी किसी भी बच्चे की पढ़ाई में बाधा न बने। उन्होंने साक्षरता, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना को शिक्षा से जोड़ा। उनके प्रयासों से राजस्थान विद्यापीठ आज उच्च शिक्षा, शोध और समाज सेवा का प्रमुख संस्थान बन चुका है।

पंडित उदय जैन : आदिवासी अंचल में शिक्षा की अलख जगाने वाले गुरु

पंडित उदय जैन ने उदयपुर जिले के कानोड़ सहित आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए जीवन समर्पित किया। उन्होंने विद्यालयों की स्थापना, विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनजागरण का कार्य किया। उनके प्रयासों से अनेक गांवों में पहली बार बच्चों को विद्यालय तक पहुंचने का अवसर मिला। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना और लोगों को बेटियों की शिक्षा के प्रति भी जागरूक किया। आज भी आदिवासी अंचल में उनका योगदान सम्मानपूर्वक याद किया जाता है।

Tags:

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *