शिल्पग्राम में जीवंत हुआ वीर सावरकर का संघर्ष, ‘मैं भी वीर सावरकर-अंश मात्र’ ने बांधा समां
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रंगशाला के तहत डोक्यू-ड्रामा शैली की प्रभावशाली प्रस्तुति, ऐतिहासिक चित्रों और वीडियो के माध्यम से दिखाई जीवन यात्रा
उदयपुर, 2 अगस्त: पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (डब्ल्यूजेडसीसी), उदयपुर की मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत रविवार को शिल्पग्राम स्थित दर्पण सभागार में ‘मैं भी वीर सावरकर – अंश मात्र’ नाटक का प्रभावशाली मंचन किया गया। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में प्रस्तुत डोक्यू-ड्रामा को खूब सराहना मिली।
केंद्र के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि इंदौर के रंगकर्मी नीलमाधव वसंत भुसारी द्वारा लिखित एवं अभिनीत इस प्रस्तुति में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर के जीवन, क्रांतिकारी विचारों, राष्ट्रभक्ति और संघर्षपूर्ण यात्रा को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक की प्रेरणा सावरकर की प्रसिद्ध रचना ‘जयोस्तुते’ से ली गई।
प्रस्तुति की विशेषता यह रही कि मंचीय अभिनय के साथ दुर्लभ ऐतिहासिक तस्वीरें, दस्तावेज, वीडियो क्लिप और स्लाइड शो का समन्वय कर दर्शकों को इतिहास के विभिन्न प्रसंगों से रूबरू कराया गया। इस संयोजन ने नाटक को एक सशक्त दृश्य-श्रव्य अनुभव बना दिया।
कार्यक्रम में केंद्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, कार्यक्रम अधिशासी राकेश मेहता, हेमंत मेहता, दयाराम परमार सहित केंद्र के अधिकारी, कर्मचारी और शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक (वित्त एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया।

