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सुविवि-राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर होगी विविध प्रतियोगिताएं, पंजीकरण प्रारंभ

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सुविवि-राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर होगी विविध प्रतियोगिताएं, पंजीकरण प्रारंभ

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उदयपुर, 4 अगस्त: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग तथा फैशन टेक्नोलॉजी एंड डिज़ाइनिंग विभाग द्वारा एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (पश्चिमी क्षेत्रीय केन्द्र, उदयपुर) के सहयोग से 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर “The Loom • The Lens • The Legacy” थीम पर विविध रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतर्गत हेरिटेज फोटोग्राफी चैलेंज, रील चैलेंज, पोस्टर एवं इलस्ट्रेशन प्रतियोगिता, आर्ट इंस्टॉलेशन प्रतियोगिता तथा हेरिटेज डिज़ाइन एंड फैशन शो आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम संयोजक एवं पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुंजन आचार्य ने बताया कि प्रतियोगिताओं में विद्यार्थी, शोधार्थी, कलाकार, डिज़ाइनर, फोटोग्राफर सहित सभी आयु वर्ग के रचनात्मक प्रतिभागी भाग ले सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि हेरिटेज फोटोग्राफी चैलेंज में शहर के प्रोफेशनल फोटोग्राफर, फोटोग्राफी प्रेमी तथा इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले सभी नागरिक भाग लेकर भारतीय हथकरघा एवं सांस्कृतिक विरासत को अपने कैमरे के माध्यम से प्रस्तुत कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पोस्टर एवं इलस्ट्रेशन तथा फोटोग्राफी प्रतियोगिता की हार्ड कॉपी कक्ष संख्या 162 में जमा करनी होगी। रील चैलेंज के प्रतिभागियों को अपनी MP4 वीडियो fashiontechnology@mlsu.ac.in पर ई-मेल करनी होगी तथा इंस्टाग्राम पर @fashion_technology_mlsu को टैग करते हुए पोस्ट करना होगा। वहीं आर्ट इंस्टॉलेशन प्रतियोगिता के प्रतिभागी 5 एवं 6 अगस्त 2026 को एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, पश्चिमी क्षेत्रीय केन्द्र, उदयपुर में अपनी इंस्टॉलेशन तैयार कर सकेंगे।
फैशन टेक्नोलॉजी एंड डिज़ाइनिंग विभाग की प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. डॉली मोगरा ने बताया कि हेरिटेज डिज़ाइन एंड फैशन शो का समन्वयन उनके निर्देशन में किया जाएगा। इस फैशन शो के माध्यम से विद्यार्थियों द्वारा भारतीय हथकरघा, पारंपरिक वस्त्रों एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को रचनात्मक एवं आकर्षक रूप में रैंप पर प्रस्तुत किया जाएगा।
आयोजकों ने सभी इच्छुक प्रतिभागियों से ऑनलाइन पंजीकरण कर समय पर अपनी प्रविष्टियाँ भेजने का आग्रह करते हुए कहा कि यह आयोजन भारतीय हथकरघा परंपरा, शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

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