हाइवे किनारे जमीन खरीदने वालों पर नए नियमों की मार
Share
भू-रूपांतरण की नई व्यवस्था से हजारों भूखंड अटके, महंगे दाम चुकाने वाले निवेशक और किसान दोनों परेशान
उदयपुर, 4 अगस्त: राजस्थान में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे अनियोजित निर्माण पर रोक लगाने के उद्देश्य से लागू किए गए भू-रूपांतरण (लैंड कन्वर्जन) के नए नियमों ने अब जमीन मालिकों, निवेशकों और रियल एस्टेट कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वर्षों पहले महंगे दामों पर खरीदी गई कृषि भूमि का अब आवासीय या व्यावसायिक उपयोग आसान नहीं रह गया है। नए नियमों के तहत हाईवे से निर्धारित दूरी, सर्विस रोड, एक्सेस कंट्रोल और संबंधित विभागों की एनओसी जैसी शर्तें अनिवार्य होने से बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित हैं।
जानकारों के अनुसार पहले हाईवे किनारे कृषि भूमि खरीदकर उसे आवासीय या व्यावसायिक भूखंड में बदलने का चलन तेजी से बढ़ा था। पेट्रोल पंप, होटल, वेडिंग गार्डन, गोदाम, शोरूम और टाउनशिप जैसी योजनाओं को ध्यान में रखकर लोगों ने करोड़ों रुपये का निवेश किया था। अब नई नीति लागू होने के बाद ऐसे कई निवेशकों को निर्माण की अनुमति नहीं मिल पा रही है।
उदयपुर में कई परियोजनाएं प्रभावित
उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे, उदयपुर-चित्तौड़गढ़ हाईवे, उदयपुर-नाथद्वारा फोरलेन तथा उदयपुर-सुखेर-भुवाणा क्षेत्र में हाईवे से सटी जमीनों की कीमतें पिछले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ी थीं। कई लोगों ने भविष्य में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, होटल और आवासीय कॉलोनियां विकसित करने के उद्देश्य से भूमि खरीदी, लेकिन अब भू-रूपांतरण की नई शर्तों के कारण फाइलें अटक गई हैं।
राजसमंद और भीलवाड़ा में भी असर
राजसमंद में नाथद्वारा और चारभुजा मार्ग तथा भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़ कॉरिडोर पर भी अनेक भूमि मालिक नई नीति से प्रभावित हैं। कई किसानों ने कृषि भूमि बेच दी, जबकि खरीददार अब निर्माण स्वीकृति नहीं मिलने से असमंजस में हैं।
क्या हैं नई व्यवस्था के प्रमुख बिंदु?
हाईवे किनारे अनियोजित प्रवेश (डायरेक्ट एक्सेस) पर नियंत्रण।
आवासीय और व्यावसायिक निर्माण के लिए निर्धारित दूरी एवं मानकों का पालन।
संबंधित प्राधिकरणों की अनापत्ति (एनओसी) अनिवार्य।
सर्विस रोड और सुरक्षित प्रवेश-निकास (एंट्री-एग्जिट) की व्यवस्था।
सड़क सुरक्षा और भविष्य के हाईवे विस्तार को ध्यान में रखकर अनुमति।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
नगर नियोजन और रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा और सुव्यवस्थित विकास के लिए यह नीति आवश्यक है, लेकिन जिन लोगों ने पुराने नियमों के तहत जमीन खरीदी थी, उनके लिए संक्रमणकालीन व्यवस्था (Transitional Policy) होनी चाहिए। अन्यथा हजारों करोड़ रुपये का निवेश लंबे समय तक फंस सकता है।
सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल
भूमि मालिकों का कहना है कि यदि नए नियम लागू करने हैं तो पुराने मामलों के लिए अलग नीति बनाई जाए। उनका तर्क है कि नियम बदलने से पहले खरीदी गई जमीनों पर पूर्व व्यवस्था के अनुसार राहत दी जानी चाहिए, ताकि वर्षों की बचत और निवेश प्रभावित न हो।
मुख्य नए नियम और पाबंदियां
व्यावसायिक निर्माण: हाईवे के मध्य बिंदु से 75 मीटर के दायरे में होटल, ढाबे, दुकान, रेस्टोरेंट या मोटल के संचालन और इसके लिए कृषि भूमि के रूपांतरण पर पूरी रोक है।
आवासीय निर्माण: हाईवे के मध्य बिंदु से 40 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के आवासीय निर्माण या कन्वर्जन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
40 मीटर के बाद की स्थिति: 40 मीटर की दूरी के बाद ही नियमों के तहत केवल आवासीय निर्माण की अनुमति मिल सकती है, लेकिन 75 मीटर तक कॉमर्शियल उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
कार्रवाई: सड़क हादसों को रोकने और अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को इस आदेश की सख्ती से पालना करने के निर्देश दिए हैं।

