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धरती सीमित है, इसलिए हमारी इच्छाएं भी सीमित हों : प्रो. चेतन सोलंकी

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धरती सीमित है, इसलिए हमारी इच्छाएं भी सीमित हों : प्रो. चेतन सोलंकी

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विद्या भवन में ऊर्जा स्वराज कार्यक्रम, बोले- हर घर बन गया है अदृश्य प्रदूषण की फैक्ट्री; समाधान भी घर से ही निकलेगा
उदयपुर, 5 अगस्त:
जलवायु परिवर्तन का समाधान केवल सरकारों और नई तकनीकों से नहीं, बल्कि हर नागरिक की जीवनशैली में बदलाव से संभव है। पृथ्वी के संसाधन सीमित हैं, इसलिए हमारा उपभोग भी सीमित होना चाहिए। यह बात आईआईटी बॉम्बे के पूर्व प्रोफेसर एवं देशभर में ‘सोलर मैन’ के नाम से प्रसिद्ध प्रो. चेतन सिंह सोलंकी ने विद्या भवन पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में आयोजित ‘ऊर्जा स्वराज’ व्याख्यान में कही।
प्रो. सोलंकी ने कहा कि औद्योगिक क्रांति के बाद पृथ्वी का औसत तापमान करीब 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। जिस तरह मनुष्य का तापमान 1.5 डिग्री बढ़ने पर तेज बुखार माना जाता है, उसी तरह धरती को भी अब “बुखार” आ चुका है। इसके बावजूद दुनिया उसी उपभोगवादी जीवनशैली पर चल रही है, जिसने यह संकट पैदा किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले 20-25 वर्षों में यदि जीवनशैली नहीं बदली गई तो मानव जीवन गंभीर संकट में पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि लोग घर के बाहर दिखाई देने वाले कचरे को देखकर चिंतित हो जाते हैं, लेकिन असली प्रदूषण दिखाई नहीं देता। एक सामान्य परिवार सालभर में करीब 150 किलोग्राम ठोस कचरा पैदा करता है, जबकि इसके मुकाबले लगभग 10 हजार किलोग्राम अदृश्य कार्बन उत्सर्जन वातावरण में छोड़ता है। घर में चलने वाले पंखे, एसी, एलपीजी, मोबाइल चार्जर, इंटरनेट और ऑनलाइन खरीदारी तक का पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि वातावरण में छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड करीब 300 वर्षों तक बनी रहती है, इसलिए आज की जीवनशैली आने वाली कई पीढ़ियों को प्रभावित करेगी।
प्रो. सोलंकी ने लोगों से एक वर्ष तक नए कपड़े नहीं खरीदने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि वस्त्र उद्योग दुनिया के सबसे प्रदूषणकारी उद्योगों में शामिल है। एक जोड़ी नए कपड़ों के निर्माण में लगभग 10 हजार लीटर पानी, 20 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन और भारी मात्रा में रासायनिक प्रदूषण होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सौर ऊर्जा या इलेक्ट्रिक वाहन जलवायु संकट का पूरा समाधान नहीं हैं, जब तक अनावश्यक उपभोग कम नहीं होगा।
इस अवसर पर उनकी पुस्तक “Climate Change 2100 – Survive or Thrive” का उदयपुर संस्करण जारी किया गया। विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि झीलों के शहर उदयपुर के लिए जलवायु परिवर्तन स्थानीय जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा गंभीर विषय है। कार्यक्रम में विद्या भवन सोसायटी के उपाध्यक्ष भगवत बाबेल, उदयपुर सोलर ऑब्जर्वेटरी के उप प्रमुख डॉ. भुवन जोशी सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, विद्यार्थी और पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।
‘सोलर बस’ ही बना प्रो. सोलंकी का चलता-फिरता घर
प्रो. चेतन सोलंकी पिछले छह वर्षों से देशभर में ‘ऊर्जा स्वराज यात्रा’ पर हैं। उनकी सोलर बस ही उनका घर, कार्यालय, बैठक कक्ष और प्रशिक्षण केंद्र है। बस की छत पर लगे सोलर पैनलों से बिजली बनती है, जिससे भोजन बनाने, काम करने और रहने की सभी जरूरतें पूरी होती हैं। इस अनूठे प्रयोग के माध्यम से वे लोगों को यह संदेश दे रहे हैं कि कम संसाधनों और स्वच्छ ऊर्जा के साथ भी सम्मानजनक एवं सुविधाजनक जीवन जिया जा सकता है। उनके अनुसार, ऊर्जा बचत और सीमित उपभोग ही भविष्य की सबसे बड़ी पर्यावरणीय पूंजी है।

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