वर्षा काल अमृत संचय का समय’, विद्यार्थियों को जल संरक्षण का दिया संदेश
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रॉयल अकादमी में जल प्रहरियों का चयन, डॉ. पी.सी. जैन ने वर्षा जल संचयन का महत्व बताया
उदयपुर, 6 अगस्त: वरिष्ठ जल मित्र डॉ. पी.सी. जैन ने कहा कि वर्षाकाल ही वह समय है जब वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर को बढ़ाया जा सकता है। जल का निर्माण नहीं किया जा सकता, लेकिन उसे बचाया, बर्बाद होने से रोका और वर्षा जल संचयन के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यही जल संरक्षण के चार प्रमुख सूत्र हैं।
रॉयल अकादमी माध्यमिक विद्यालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. जैन ने वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से विद्यार्थियों को जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन की जानकारी दी। उन्होंने छात्र-छात्राओं से भविष्य के ‘जल दूत’ और ‘जल प्रहरी’ बनकर समाज में जल संरक्षण का संदेश फैलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मानसी मेघवाल, दीक्षा मेघवाल, दीक्षिता सेजू, अक्षयराज सिंह, जिज्ञासा जैन, भूमि प्रजापत, दीपिका देवासी, सृष्टि लोहार, वैभव व्यास, सिद्धिका बैरवा, दिव्याक्षी जांगिड़, प्राची मेघवाल तथा रितुराज चावड़ा को जल दूत के रूप में चयनित किया गया। विद्यालय में जल संरक्षण गतिविधियों के संचालन के लिए श्रीमती शीतल को प्रभारी बनाया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. मंजु शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।

