हरियाली अमावस्या पर सोने की पोशाक में सजे सांवलियाजी, बारिश में भी उमड़ा आस्था का सैलाब
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मंगला आरती से पहले लगी कतारें, मालपुए का भोग; मध्यप्रदेश-गुजरात समेत कई राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालु
विवेक शर्मा, मंडफिया, 12 अगस्त: हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर प्रसिद्ध श्री सांवलियाजी सेठ मंदिर में बुधवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान सांवलियाजी का विशेष श्रृंगार कर उन्हें सोने की पोशाक धारण कराई गई। सुबह मंगला आरती से पहले ही मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। दोपहर बाद तेज बारिश ने जरूर श्रद्धालुओं की परीक्षा ली, लेकिन भक्ति और आस्था के आगे मौसम भी बेअसर नजर आया। बारिश में भी भक्त कतारों में डटे रहे और देर शाम तक दर्शन का सिलसिला जारी रहा। मंदिर परिसर से लेकर बाजारों तक दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा और जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।
सोने की पोशाक में हुआ विशेष श्रृंगार
हरियाली अमावस्या पर भगवान सांवलियाजी का विशेष श्रृंगार किया गया। ओसरा पुजारी कमलेश वैष्णव और गोविंद वैष्णव ने भगवान को गंगाजल से स्नान करवाया। इसके बाद सोने से निर्मित पोशाक धारण कराई गई। भगवान के मस्तक पर केसर-चंदन का तिलक लगाया गया। गुलाब के फूलों के साथ नोटों की माला और तुलसी का गुच्छ भी अर्पित किया गया। मंदिर के मुख्य गर्भगृह से लेकर कॉरिडोर तक फूलों की लड़ियों और रंग-बिरंगे गुलदस्तों से आकर्षक सजावट की गई।
मंगला आरती से पहले उमड़ी भीड़
अमावस्या के चलते श्रद्धालु तड़के ही मंदिर पहुंचने लगे। सुबह 5 बजे मंगला आरती शुरू होने से पहले ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। मध्यप्रदेश, गुजरात सहित राजस्थान के आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कई भक्त पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचे। पुरुष जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे, वहीं महिलाएं भजन और मंगल गीत गाती नजर आईं।
तेज बारिश भी नहीं रोक पाई आस्था
दोपहर करीब 1 बजे बाद क्षेत्र में तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी हुई, लेकिन दर्शन के लिए लगी कतारें नहीं टूटीं। कई श्रद्धालु भीगते हुए अपनी बारी का इंतजार करते रहे। हालांकि आसपास के गांवों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर बारिश का असर पड़ा। इसके बावजूद मंदिर परिसर में देर शाम तक भक्तों की मौजूदगी बनी रही।
मालपुए का भोग, जगह-जगह सेवा शिविर
हरियाली अमावस्या पर भगवान सांवलियाजी को विशेष रूप से मालपुए का भोग लगाया गया। इसके बाद नई धर्मशाला में ब्रह्मभोज और देवकी सदन धर्मशाला में महाप्रसादी का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं के लिए भादसोड़ा रोड पर राम रसोड़े लगाए गए। कई स्थानों पर चाय, पकौड़े, केले और अन्य फल नि:शुल्क वितरित किए गए। मंदिर के आसपास पूजा सामग्री, प्रसाद और खान-पान की दुकानों पर भी दिनभर भीड़ रही।
मंदिर मंडल और पुलिस ने संभाली व्यवस्थाएं
भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर मंडल ने पहले से व्यापक व्यवस्थाएं की थीं। प्रशासनिक अधिकारियों और मंदिर प्रबंधन ने लगातार व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था की निगरानी की गई। पुलिस प्रशासन ने भी अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया। प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था संभाली गई और कस्बे के बाहर पार्किंग की व्यवस्था कर वाहनों का प्रवेश नियंत्रित किया गया। इससे मंदिर क्षेत्र में पैदल आने वाले श्रद्धालुओं को सुगमता रही और मेले की व्यवस्थाएं सुचारु बनी रहीं।

