डेढ़ साल में 1850 लोगों ने जहर खाकर जान देने की कोशिश
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कलेक्टर बोले- आवेश में कोई कदम उठाने से पहले 5 सेकेंड रुककर सोचें; पति-पत्नी के विवाद के मामले ज्यादा
बांसवाड़ा, 16 अगस्त: बांसवाड़ा जिले में पारिवारिक विवाद, आपसी कहासुनी और छोटी-छोटी बातों पर आवेश में आकर जहर या कीटनाशक सेवन करने के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में अकेले महात्मा गांधी हॉस्पिटल के आंकड़ों के अनुसार 1850 लोग जहर खाकर जान देने का प्रयास कर चुके हैं। औसतन प्रतिदिन करीब चार मामले अस्पताल पहुंच रहे हैं। PHC और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के आंकड़े शामिल किए जाएं तो संख्या और अधिक हो सकती है।
कलेक्टर बोले- आवेश में निर्णय लेने से बचें
जिला कलेक्टर ने कहा कि जीवन अनमोल है। पारिवारिक, आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों में तनाव होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी विवाद या मानसिक तनाव में गलत कदम उठाने से पहले कम से कम पांच सेकेंड रुककर विचार करना चाहिए। परिवार के लोगों से बातचीत करें और जरूरत पड़ने पर मदद लें। जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं और टेली मानस के माध्यम से भी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता ली जा सकती है।
पति-पत्नी के विवाद के मामले ज्यादा
MGH की मेडिसिन हेड डॉ. दीपा कटारा ने बताया कि अस्पताल में 14 वर्ष के बच्चों से लेकर 60-65 वर्ष तक के लोगों में जहर सेवन के मामले आ रहे हैं। युवाओं के मामले अधिक हैं। इनमें पति-पत्नी और माता-पिता से मामूली कहासुनी के बाद आवेश में उठाया गया कदम प्रमुख है। उन्होंने कहा कि जहर सेवन के बाद मरीज को जल्द अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है। वर्तमान मौसम में कीटनाशक पॉइजनिंग के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों ने अपील की कि मरीज ने जिस दवा का सेवन किया है, उसका नाम या फोटो अस्पताल जरूर लाएं।

