11 साल पुराने हत्याकांड में दो दोषियों को उम्रकैद
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मुनीम सेन की हत्या के मामले में बड़ीसादड़ी अदालत का फैसला, दोनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना
चित्तौड़गढ़, 6 अक्टूबर: बड़ीसादड़ी अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश अभिषेक ने करीब 11 साल पुराने हत्या के मामले में फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा 20-20 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 एवं 34 के तहत दोषी माना।
प्रकरण के अनुसार 29 सितंबर 2015 की रात खोड़िप निवासी मुनीम सेन की लक्ष्मीलाल कुमावत के मकान पर हत्या कर दी गई थी। अभियोजन के अनुसार मिट्ठूलाल डांगी ने मुनीम सेन के सिर पर लट्ठ से वार किया था। गंभीर चोट लगने से उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच के दौरान हत्या के पीछे मृतक के लक्ष्मीलाल कुमावत की पत्नी से अवैध संबंध होने की बात सामने आई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष कुल 24 गवाहों के बयान करवाए तथा 28 महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किए। अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत तर्कों तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने लक्ष्मीलाल पुत्र मांगीलाल कुमावत निवासी खोड़िप और मिट्ठूलाल पुत्र कालूराम डांगी निवासी तेजपुरा को हत्या का दोषी माना।
अदालत ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास के साथ 20-20 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। करीब 11 वर्ष पुराने इस मामले में न्यायालय के फैसले के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले अतिरिक्त लोक अभियोजक विजय सिंह राठौड़ की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।

