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गवरी से मेवाड़ी रसोई तक, उदयपुर अब अपनी सांस्कृतिक पहचान का बनाएगा दस्तावेजी खजाना

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गवरी से मेवाड़ी रसोई तक, उदयपुर अब अपनी सांस्कृतिक पहचान का बनाएगा दस्तावेजी खजाना

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यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क में जगह बनाने की तैयारी; 100 से ज्यादा लोककलाओं, परंपराओं, हस्तशिल्प और व्यंजनों की होगी मैपिंग, पांच साल की कार्ययोजना बनेगी
उदयपुर, 11 अक्टूबर:
उदयपुर अब अपनी झीलों और ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ जीवंत लोक संस्कृति को भी दुनिया के सामने रखने की तैयारी कर रहा है। नगर निगम ने उदयपुर को यूनेस्को के क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क में शामिल कराने की कवायद शुरू की है। इसके लिए शहर की सांस्कृतिक पहचान को सिर्फ स्मारकों तक सीमित रखने के बजाय गवरी, गैर, जल सांझी से लेकर पिछवाई, कठपुतली, टेराकोटा और पारंपरिक मेवाड़ी व्यंजनों तक का व्यापक दस्तावेजीकरण कराया जाएगा। योग्य सलाहकार संस्था के चयन के लिए निगम ने निविदाएं आमंत्रित की हैं।
लोक परंपराओं से कारीगरों तक पूरा सांस्कृतिक नक्शा:
इस कवायद में मेवाड़ की गवरी लोकनाट्य परंपरा को प्रमुखता दी जाएगी। इसमें गवरी के धार्मिक महत्व, संगीत, नृत्य, वेशभूषा और इससे जुड़े कलाकारों की जानकारी दर्ज होगी। मेवाड़ी गैर, फूलडोल, जल सांझी, शस्त्र पूजन और अस्त्र पूजन जैसी परंपराओं की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी रिकॉर्ड की जाएगी। साथ ही पिछवाई व लघु चित्रकला, मौलेला टेराकोटा, कठपुतली, पारंपरिक वस्त्र निर्माण, ठठेरा-सिकलीगर कला, पत्तल-दोने और बांस की टोकरियों से जुड़े कारीगरों का सर्वे होगा।
अब मेवाड़ के स्वाद की भी होगी पहचान:
दस्तावेजीकरण में स्थानीय खानपान को भी सांस्कृतिक विरासत के रूप में शामिल किया जाएगा। राब, मक्के की रोटी, दाल-बाटी-चूरमा, ढोकले, लपसी और मक्के के खींध जैसे पारंपरिक व्यंजनों की निर्माण विधियां दर्ज की जाएंगी। इन्हें पर्यटन से जोड़ने की योजना है, ताकि स्थानीय खानपान और उससे जुड़े लोगों को भी नई पहचान मिल सके।
पांच साल की कार्ययोजना से संरक्षण और पर्यटन को जोड़ेंगे:
चयनित सलाहकार संस्था शहर के सांस्कृतिक संसाधनों की मैपिंग कर पांच साल की कार्ययोजना तैयार करेगी। यूनेस्को के मानकों के अनुरूप नामांकन प्रस्ताव, नक्शे और दस्तावेज तैयार किए जाएंगे। निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के अनुसार पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य संस्कृति को केवल दस्तावेजों में दर्ज करना नहीं, बल्कि उसके संरक्षण, नई पीढ़ी से जुड़ाव और पर्यटन के विस्तार का माध्यम बनाना है। निगम अधीक्षण अभियंता मनीष अरोड़ा को नामांकन संबंधी कार्य के लिए विशेष जिम्मेदारी दी गई है। महापौर पारस सिंघवी ने भी अधिकारियों को इसी दिशा में प्रभावी रणनीति बनाने के निर्देश दिए हैं।

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