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सिटी पैलेस में 19वीं सदी की दुर्लभ तस्वीरों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी शुरू

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सिटी पैलेस में 19वीं सदी की दुर्लभ तस्वीरों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी शुरू

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मेवाड़ राजघराने के लक्ष्यराजसिंह बोले, ब्रिटिश लाइब्रेरी और सिटी पैलेस संग्रहालय के संग्रहों से ऐतिहासिक छवियां प्रदर्शित, 31 मार्च 2027 तक देख सकेंगे दर्शक
उदयपुर, 15 अक्टूबर:
सिटी पैलेस संग्रहालय में गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘अर्ली फोटोग्राफी एंड आर्कियोलॉजी इन वेस्टर्न इंडिया : द उदयपुर चैप्टर’ का शुभारंभ हुआ। जनाना महल स्थित फतेह निवास गैलरी में आयोजित इस प्रदर्शनी में 19वीं शताब्दी की दुर्लभ तस्वीरों के माध्यम से मेवाड़ सहित पश्चिमी भारत की ऐतिहासिक धरोहर, स्थापत्य और सांस्कृतिक जीवन को प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी 15 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी।
यह प्रदर्शनी ब्रिटिश लाइब्रेरी, लंदन; छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय, मुंबई और महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के सिटी पैलेस संग्रहालय का संयुक्त प्रयास है। इस अवसर पर मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान एवं फाउंडेशन के अध्यक्ष और प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि प्रदर्शनी उस परंपरा की निरंतरता है, जिसमें पीढ़ियों से इतिहास, संस्कृति और धरोहर को संजोया जाता रहा है। इन तस्वीरों में केवल बीते समय की छवियां नहीं, बल्कि मेवाड़ की सामूहिक स्मृतियां भी समाहित हैं।
ब्रिटिश लाइब्रेरी के अंतरिम मुख्य कार्यकारी डॉ. जेरेमी सिल्वर ने कहा कि संस्थागत सहयोग से ऐतिहासिक संग्रहों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर मिलता है। छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय के महानिदेशक सब्यसाची मुखर्जी ने इसे विभिन्न संस्थानों के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने की पहल बताया।
प्रदर्शनी में 1850 से 1890 के दशक के बीच खींची गई तस्वीरें शामिल हैं। इनमें अजंता, एलोरा, नासिक, हम्पी और सोमनाथ सहित पश्चिमी भारत के प्रमुख ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक स्थलों की तत्कालीन स्थिति दिखाई गई है। मेवाड़ से संबंधित तस्वीरों में सिटी पैलेस, झीलों, मंदिरों, उद्यानों, प्रवेश द्वारों, गलियों और स्थापत्य स्मारकों के साथ राजदरबार के लोगों, समारोहों और सांस्कृतिक जीवन की झलक भी मिलेगी।
इन तस्वीरों के विशेष प्रिंट शांतिनिकेतन के स्टूडियो गोप्पो ने 19वीं शताब्दी की सॉल्टेड पेपर और एल्ब्यूमेन प्रिंटिंग प्रक्रियाओं का उपयोग कर तैयार किए हैं।
प्रदर्शनी में मेवाड़ में फोटोग्राफी की ऐतिहासिक परंपरा को भी रेखांकित किया गया है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, 1818 में मेवाड़ दरबार में कैमरा ऑब्स्क्यूरा जैसे प्रकाशीय उपकरण का उपयोग होता था। कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक ‘ट्रैवल्स इन वेस्टर्न इंडिया’ में महाराणा भीम सिंह के शासनकाल में कुंवर अमर सिंह को इस उपकरण की जानकारी दिए जाने का उल्लेख किया है। प्रदर्शनी दर्शकों को मेवाड़ के अतीत, बदलते शहरी परिदृश्य और ऐतिहासिक तस्वीरों के संरक्षण के महत्व को समझने का अवसर देगी।

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