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फतेहसागर की दहलीज पर कचरे का पहाड़, मानसून में झील में समा सकता है सैकड़ों टन मलबा

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फतेहसागर की दहलीज पर कचरे का पहाड़, मानसून में झील में समा सकता है सैकड़ों टन मलबा

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पेयजल स्रोत पर बढ़ा पर्यावरणीय खतरा; झील संरक्षण समिति ने अवैध डंपिंग हटाने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठाई मांग
उदयपुर, 5 जुलाई:
उदयपुर की जीवनरेखा मानी जाने वाली फतेहसागर झील पर मानसून के बीच बड़ा पर्यावरणीय संकट मंडराने लगा है। झील संरक्षण समिति के पदाधिकारियों और पर्यावरण प्रेमियों ने रविवार को उपरला तालाब क्षेत्र का निरीक्षण किया तो रानी रोड स्थित श्मशान के पास झील के जलग्रहण क्षेत्र में सैकड़ों टन निर्माण एवं विध्वंस मलबा, प्लास्टिक, पॉलीथिन, घरेलू कचरा, होटलों का परित्यक्त सामान, गद्दे-रजाइयां और अन्य ठोस अपशिष्ट का विशाल डंपिंग स्थल मिला। आशंका है कि तेज बारिश के साथ यह पूरा कचरा बहकर सीधे फतेहसागर झील में पहुंच सकता है।


झील संरक्षण समिति के सहसचिव डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि यदि मानसून के दौरान इस अवैध डंपिंग को तत्काल नहीं हटाया गया तो झील में सिल्ट बढ़ने, जल गुणवत्ता खराब होने, जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचने तथा जल संग्रहण क्षमता घटने का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने निर्माण मलबे को जल प्रवाह में बाधक और प्लास्टिक कचरे को गंभीर प्रदूषण का कारण बताया।
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेजशंकर पालीवाल ने इसे पर्यावरणीय नियमों का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि फतेहसागर केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि शहर का प्रमुख पेयजल स्रोत है। सामाजिक चिंतकों ने पूरे क्षेत्र को डंपिंग मुक्त घोषित कर चौबीसों घंटे निगरानी, अवैध कचरा फेंकने वालों की पहचान और उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही नागरिकों और होटल संचालकों से झील किनारे कचरा नहीं डालने की अपील भी की गई है।

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